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उत्तर प्रदेश में ISI से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़, निशाने पर थे रेल सिग्नल; 4 गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश ATS ने ISI से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

उत्तर प्रदेश में ISI से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़, निशाने पर थे रेल सिग्नल; 4 गिरफ्तार

लेखन आबिद खान
Apr 04, 2026
05:04 pm

क्या है खबर?

उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को बड़ी सफलता मिली है। ATS ने लखनऊ रेलवे स्टेशन से 4 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनका संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से बताया जा रहा है। कथित तौर पर ये लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक रेलवे सिग्नल बॉक्स को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे। आरोप है कि गिरोह का सरगना पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलर के सीधे संपर्क में थे।

खुलासा

गिरफ्तार किए गए आरोपी कौन हैं?

गिरफ्तार किए गए लोगों में साकिब उर्फ डेविल (25 वर्ष), मेरठ के अगवानपुर का रहने वाला अरबाब (20 वर्ष), मेरठ का विकास गहलावत उर्फ रौनक (27 वर्ष), गौतम बुद्ध नगर का लोकेश उर्फ पपला पंडित (19 वर्ष) शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि ये आरोपी पिछले 3 महीनों से सक्रिय थे और खास लोगों की आवाजाही समेत अहम स्थानों की जानकारी जुटाकर अपने हैंडलर्स को दे रहे थे।

सिग्नल

रेल हादसा कराने की थी साजिश

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ये लोग लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास सिग्नल बॉक्स को उड़ाने की योजना बना रहे थे, जिससे रेल यातायात बाधित हो और रेल दुर्घटना हो सके। आरोपी गैस सिलेंडर ट्रकों और शोरूम में आगजनी कर अफरा-तफरी फैलाना चाहते थे। विकास और लोकेश नोएडा में रहकर नेताओं, प्रतिष्ठित संस्थानों और संवेदनशील ठिकानों की रेकी कर रहे थे।

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रेकी

आरोपियों ने लखनऊ समेत कई शहरों में रेकी की

आरोप है कि गिरोह ने लखनऊ, गाजियाबाद और मेरठ सहित कई शहरों में रेकी की थी। इन लोगों ने प्रमुख प्रतिष्ठानों और वाहन शोरूमों की तस्वीरें और वीडियो एकत्र साझा किए थे। इंडिया टुडे के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान में बैठा हैंडलर गूगल लोकेशन स्क्रीन रिकॉर्डिंग साझा करता था, जिसके बाद आरोपी इन जगहों की तस्वीरें और वीडियो भेजते थे। गिरोह के सरगना साकिब को पाकिस्तान में बैठा ISI हैंडलर फंडिंग करता था।

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आरोप

सोशल मीडिया के जरिए साकिब के संपर्क में आए बाकी आरोपी

आरोप है कि पाकिस्तान स्थित संचालक ने इन लोगों को भड़काने के लिए ओसामा बिन लादेन, फरहतुल्लाह गोरी, कश्मीर मुजाहिदीन और गजवा-ए-हिंद जैसे नामों का इस्तेमाल किया। लोकेश और विकास साकिब के सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उसके संपर्क में आए थे, जिनमें हथियारों की तस्वीरें दिखाई गई थीं। ATS अब डिजिटल सबूतों, मोबाइल फोन और बाकी सामग्री की जांच कर रही है और आरोपियों की एक हफ्ते की रिमांड मांगी है।

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