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भाजपा के साथ टकराव के बीच शंकराचार्य के खिलाफ POCSO के तहत मुकदमा दर्ज, पूछताछ होगी
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ POCSO के तहत मुकदमा दर्ज

भाजपा के साथ टकराव के बीच शंकराचार्य के खिलाफ POCSO के तहत मुकदमा दर्ज, पूछताछ होगी

लेखन गजेंद्र
Feb 23, 2026
01:12 pm

क्या है खबर?

उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के साथ टकराव के बीच राज्य पुलिस ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बाल यौन शोषण के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मुकदमा प्रयागराज के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (POCSO कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर दर्ज किया है। उन्होंने स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की शिकायत पर शनिवार को शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

धारा

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?

शंकराचार्य के खिलाफ मुकदमा झूंसी पुलिस थाने में लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी POCSO कानून की धाराओं के तहत किया गया है। ABP न्यूज के मुताबिक, पुलिस ने POCSO अधिनियम की धारा 5/6 समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा किया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 351(3), POCSO अधिनियम की धारा 5, 6, 3, 4(2), 16 और 17 शामिल है। बताया जा रहा है कि पुलिस सोमवार से शंकाराचार्य से पूछताछ कर सकती है।

आरोप

शंकराचार्य पर क्या है आरोप?

याचिकाकर्ता आशुतोष ने आरोप लगाया है कि प्रयागराज में माघ मेले के दौरान 18 जनवरी, 2026 के आसपास आरोपी शंकराचार्य ने नाबालिग बच्चों का यौन उत्पीड़न किया था। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में आरोपों के समर्थन में शपथपत्र दिया है, जिसकी प्रयागराज पुलिस आयुक्त द्वारा प्रारंभिक जांच में पुष्टि की गई है। पुलिस ने पीड़ितों से पूछताछ की, जिसमें बताया गया कि शंकारचार्य ने धार्मिक सेवा और मार्गदर्शन प्रदान करने का दिखावा करते हुए ये कृत्य किया है।

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टकराव

माघ मेले में टकराव के बाद विवादों में घिरे शंकराचार्य

यह विवाद तब सामने आया, जब प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य को स्नान करने से रोका गया और उनके अनुयायियों से पुलिस ने अभद्रता की थी। इसके बाद शंकराचार्य ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इस बीच प्रयागराज मेला प्रशासन ने उनसे 'शंकराचार्य' उपाधि पर भी ऐतराज जता दिया था। स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य के याचिकाकर्ता होने से भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वे शंकराचार्य के आलोचक हैं।

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