भारतीय सेना का 20,000 करोड़ का 'आत्मनिर्भर' भविष्य, AI ड्रोन से दुश्मन पर हर पल नजर
भारतीय सेना लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे मुश्किल इलाकों में किसी भी चुनौती से निपटने के लिए 20,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का अपग्रेड कर रही है। इस योजना के तहत सेना में स्वदेशी ड्रोन, स्मार्ट निगरानी उपकरण और लोइटरिंग म्यूनिशन शामिल किए जाएंगे।
इससे हमारी सेना तकनीकी रूप से और मजबूत बनेगी, साथ ही उसे आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। यह सारा काम 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।
कामिकाज ड्रोन और AI सेंसर का परीक्षण
इन अपग्रेड में कामिकाज ड्रोन शामिल होंगे, जो खास निशाने पर हमला करके खुद को खत्म कर देंगे। साथ ही, AI-पावर्ड सेंसर भी लगाए जाएंगे जो रियल टाइम में हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे। इनमें 15,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ने वाले मानव रहित प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।
इन सभी नए उपकरणों को ऐसी मुश्किल परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है, जहां इन्हें कम से कम सपोर्ट की जरूरत पड़े। इनके मैदानी परीक्षण पहले से ही शुरू हो चुके हैं और उम्मीद है कि अगले 24 से 36 महीनों में इन्हें सेना में शामिल कर लिया जाएगा।
जवानों के जोखिम को कम करने के लिए अपग्रेड
अधिकारियों का मानना है कि ये अपग्रेड कमांडरों को तेजी से फैसले लेने में मदद करेंगे और जवानों की सुरक्षा भी बढ़ाएंगे। इनसे जवानों को खतरनाक इलाकों में शारीरिक रूप से मौजूद रहने की जरूरत कम होगी। कुल मिलाकर, इनका लक्ष्य है कि कम जोखिम के साथ ज्यादा समझदारी से ऑपरेशन चलाए जा सकें।