सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्ग के बेटे को लगाई कड़ी फटकार, बरकरार रखा बेदखली का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के एक बुजुर्ग पिता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके बेटे को पारिवारिक घर से बेदखल करने के आदेश को सही ठहराया है। पिता ने बताया था कि बेटा उन्हें परेशान कर रहा है और वे अपने घर में सुकून से रहना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम' का सहारा लिया। इससे पहले हाई कोर्ट और स्थानीय ट्रिब्यूनल भी पिता की इस अपील को सही ठहरा चुके थे।
विक्रम नाथ ने बेटे को फटकार लगाई
बेटे ने बेदखली रुकवाने की कोशिश की। उसका कहना था कि यही उसका इकलौता घर है और यह पुश्तैनी संपत्ति है जिसमें कई वारिसों का हक है। सुनवाई के दौरान, जस्टिस विक्रम नाथ ने बेटे के रवैये पर सख्त सवाल उठाए। उन्होंने बेटे से कहा, "तुम किस तरह के बेटे हो? अपने ही पिता से लड़ रहे हो!? यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जाओ और अपने पिता की सेवा करो। उसे अपनी जिंदगी के बाकी बचे समय के लिए शांति से जीने दो।" आखिर में कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को सबसे ऊपर रखा और बेटे की सभी दलीलों को खारिज कर दिया।