TMC के 20 सांसदों के विलय पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, ओम बिरला समेत सभी से मांगा जवाब
तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर अपने 20 सांसदों को अयोग्य घोषित करने के फैसले को टालने का आरोप लगाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया है। इन सांसदों का कहना है कि उन्होंने एक कम जानी-पहचानी पार्टी, राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ विलय कर लिया है, लेकिन TMC इन दावों को नहीं मानती है। अब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लोकसभा अध्यक्ष और इन बागी सांसदों से इस मामले पर जवाब मांगा है।
TMC बोली - सिर्फ पार्टी ही कर सकती है विलय
TMC का तर्क है कि केवल एक राजनीतिक दल ही किसी अन्य दल के साथ विलय कर सकता है, न कि केवल सांसदों का एक समूह। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के 2023 के उस फैसले का हवाला भी दिया है, जो महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट में शिवसेना से जुड़ा था। चूंकि ये 28 में से 20 सांसद TMC के लोकसभा सदस्यों के दो-तिहाई से ज्यादा हैं, ऐसे में आगे जो भी फैसला आएगा, उससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा फेरबदल हो सकता है। TMC चाहती है कि अदालत इस मामले पर जल्द सुनवाई कर फैसला सुनाए, ताकि इस पर अब और इंतजार न करना पड़े।