सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश: महिलाओं के विशेष तलाक अधिकार बरकरार, निजी विवादों में PIL पर चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में हिंदू विवाह अधिनियम के एक प्रावधान को चुनौती दी गई थी। इस कानून के तहत पत्नियां गुजारा भत्ते का आदेश मिलने के बाद एक साल से ज्यादा समय तक साथ न रहने पर अपने पति से तलाक ले सकती हैं, लेकिन यह नियम पतियों पर लागू नहीं होता है। कानून के छात्र जितेंद्र सिंह ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि यह नियम पुरुषों के साथ अन्याय करता है और इसे लिंग-भेदभाव रहित होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका के गलत इस्तेमाल पर दी चेतावनी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली एक बेंच ने कहा कि संसद के पास महिलाओं के लिए विशेष नियम बनाने का अधिकार है और पीठ को इस नियम में बदलाव करने का कोई ठोस कारण नहीं मिला है। न्यायाधीशों ने यह भी बताया कि जितेंद्र सिंह का अपना वैवाहिक विवाद चल रहा है। अदालत ने इस बात पर भी चेतावनी दी कि लोग अपने निजी मसलों को निपटाने के लिए जनहित याचिकाओं का दुरुपयोग न करें। साफ शब्दों में कहें तो, अदालत चाहती है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने ये कानून वैसे ही बरकरार रहें और जनहित याचिकाओं का इस्तेमाल निजी लड़ाई के लिए न किया जाए।