सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई तो भी अपने आप नहीं मिलेगी बेल
सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया है कि अगर किसी को गिरफ्तारी की लिखित वजह नहीं बताई जाती, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे अपने आप जमानत मिल जाएगी।
यह बात एक जासूसी के मामले में सामने आई, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट ने झाबरा राम को जमानत दे दी थी।
झाबरा राम पर आरोप था कि उसने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को संवेदनशील सैन्य जानकारी पहुंचाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि असल बात यह है कि कागजी कार्रवाई में हुई चूक से आरोपी के अधिकारों को कितना नुकसान हुआ, सिर्फ यह नहीं कि कोई एक कदम छूट गया।
जमानत के लिए आरोपी को नुकसान साबित करना होगा
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश पर आधारित है। उस आदेश में कहा गया था कि पुलिस को गिरफ्तारी की वजह लिखित में और उस भाषा में बतानी होगी जिसे आरोपी समझता हो। इसका मकसद गलत तरीके से होने वाली गिरफ्तारियों को रोकना था। लेकिन अब कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि हर छोटी-मोटी तकनीकी गलती की वजह से जमानत नहीं मिल जाएगी।
जमानत पर विचार करने से पहले, यह पक्का सबूत देना होगा कि गलती से आरोपी को सच में नुकसान हुआ है।