सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश, अदालत के लाइव वीडियो गलत तरीके से इस्तेमाल हुआ तो खैर नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से ऐसे लोगों पर लगाम कसने को कहा है जो लाइवस्ट्रीम किए गए अदालती वीडियो का गलत इस्तेमाल करते हैं या उन्हें निजी या व्यावसायिक फायदे के लिए बदल देते हैं।
इस पहल का मकसद अदालती कार्यवाही की सामग्री को प्रामाणिक बनाए रखना और उसे ऑनलाइन गलत तरीके से प्रसारित होने या तोड़-मरोड़ कर पेश होने से रोकना है।
सरकार अब नए नियम बनाने पर काम कर रही है, जिसके लिए अलग-अलग हाई कोर्ट और संबंधित पक्षों से राय ली जा रही है।
कोर्ट वीडियो के लिए डिजिटल वॉटरमार्क का प्रस्ताव
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने अदालती रिकॉर्डिंग को बिना इजाजत सोशल मीडिया पर साझा करने पर रोक लगा दी थी। हालांकि, खबरिया चैनल अभी भी अदालती कार्यवाही की रिपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन वीडियो क्लिप के साथ नहीं। अब यह भी चर्चा चल रही है कि आधिकारिक वीडियो में डिजिटल वॉटरमार्क लगाए जाएं, ताकि उनसे छेड़छाड़ न हो सके या उन्हें नकली न बनाया जा सके।
उम्मीद है कि ये नए अपडेट जल्द ही आएंगे, जिनका मकसद अदालती कार्यवाही की ईमानदारी बनाए रखना है, क्योंकि अब ज़्यादातर कार्यवाही ऑनलाइन हो रही है।