सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ वॉट्सऐप खामोशी 'क्रूरता' नहीं, इंजीनियर बरी!
उच्चतम न्यायालय ने मस्कट में रहने वाले एक इंजीनियर को 2018 के क्रूरता के मामले से बरी कर दिया है। उन्हें 2015 में हुई उनकी पत्नी की आत्महत्या से जुड़े मामले में निचली अदालत ने दोषी ठहराया था। निचली अदालतों ने इंजीनियर को क्रूरता का दोषी माना था, लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत ने साफ कहा कि उनके क्रूर होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला।
उच्चतम न्यायालय ने आरोप हटाए, पासपोर्ट वापस करने का आदेश दिया
मुख्य आरोप यह था कि पत्नी के बिना बताए अपने मायके जाने के बाद इंजीनियर ने उन्हें 13 दिनों तक नज़रअंदाज़ किया था। मगर अदालत ने कहा कि वॉट्सऐप पर खामोशी या सिर्फ मौखिक बयान कोई पुख्ता सबूत नहीं माने जा सकते। चूंकि इस बात के कोई कॉल रिकॉर्ड या उत्पीड़न के वास्तविक सबूत नहीं मिले, इसलिए न्यायाधीशों ने साफ कहा कि पति-पत्नी के बीच के सिर्फ आपसी मतभेद कानूनी क्रूरता नहीं कहलाते। इसी वजह से उन पर और उनके परिवार पर लगे सभी आरोप हटा दिए गए हैं, और उनका पासपोर्ट भी उन्हें लौटा दिया जाएगा।