मुंबई RTO का मराठी टेस्ट: चालकों ने की हड़ताल, अब हाई कोर्ट में दी जाएगी नियम को चुनौती
मुंबई में इन दिनों ऑटो या टैक्सी मिलना मुश्किल हो रहा है और इसका कारण 20 अगस्त से प्रादेशिक परिवहन अधिकारियों (RTO) द्वारा चालकों का मराठी भाषा से संबंधित टेस्ट लेना है। दरअसल, 12 अगस्त को संशोधित हुए एक नियम के तहत व्यावसायिक यात्री वाहन चलाने वाले और परमिट धारक ऑटो रिक्शा, टैक्सी और इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाली ऐप-आधारित कैब के चालकों को मराठी का व्यावहारिक ज्ञान होना जरूरी है। इसमें किराया तय करने की बातचीत और रास्ता बताने जैसी बातें शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे यात्रियों और चालकों के बीच मराठी में बातचीत आसान हो जाएगी और महाराष्ट्र की भाषा और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा मिलेगा।
मुंबई के चालकों ने की हड़ताल
कई चालकों को यह फैसला पसंद नहीं आ रहा है। उन्हें डर है कि टेस्ट के नियम साफ नहीं हैं और परीक्षा की तैयारी करने में उनकी कमाई का नुकसान होगा। 24 अगस्त से शुरू हुई 3 दिवसीय की हड़ताल ने सार्वजनिक परिवहन को काफी अस्त-व्यस्त कर दिया। एक ही दिन में 1,268 चालकों को नोटिस दिए गए, जबकि 3,995 चालकों का टेस्ट हुआ और मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में 604 चालकों में जरूरी मराठी ज्ञान नहीं पाया गया। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री इस नियम का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यूनियनें और समय मांग रही हैं। यहां तक कि 25 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की जाने वाली है, जो इस नए मराठी नियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देगी।