PAC का खुलासा: 42,500 करोड़ रुपये के रक्षा ऑफसेट अटके, सेना के आधुनिकीकरण पर गंभीर सवाल
लोक लेखा समिति (PAC) ने रक्षा सौदों से जुड़े 42,500 करोड़ रुपये के ऑफसेट दायित्वों को पूरा न किए जाने पर चिंता जताई है। ये ऐसे वादे थे, जो कंपनियों ने निभाए नहीं। ऑफसेट का मकसद भारतीय उद्योग को बढ़ावा देना है। इसके तहत विदेशी कंपनियों को, जो भारत को रक्षा सामान बेचती हैं, अपने निवेश का कुछ हिस्सा भारत में ही करना होता है। लेकिन यह नीति उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो पाई है। मौजूदा रक्षा सौदों में किए गए लगभग आधे वादे अब भी अधूरे हैं।
लोक लेखा समिति: 9.9 में से सिर्फ 5.46 बिलियन डॉलर ही पूरे हुए
इन सौदों से कुल 9.9 बिलियन डॉलर हासिल होने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक सिर्फ 5.46 बिलियन डॉलर के ऑफसेट वादे ही पूरे हो पाए हैं। समिति ने इस धीमी रफ्तार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि 31 दिसंबर 2025 तक सभी बचे हुए दायित्वों को तुरंत निपटाया जाए।
इसके साथ ही, उन्होंने एक जांच कराने की भी मांग की है, ताकि पता चल सके कि काम की असली स्थिति क्या है। इसके अलावा, समिति ने सेना और वायु सेना के लिए तोपखाने और हेलीकॉप्टरों के अपग्रेड में हो रही भारी देरी पर भी चिंता जताई है। समिति ने यह भी बताया कि कुछ उपकरण पहुंचने में दशकों लग गए, जिससे सेना की तैयारी और आधुनिकीकरण की योजनाओं पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।