अमेरिका ने चीनी रोबोट पर क्यों लगाया प्रतिबंध? यहां जानिए वजह
क्या है खबर?
चीन में बने रोबोट पर अमेरिकी सरकार ने प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन ने नए नियमों का ऐलान करते हुए चीन में बने ह्यूमनॉइड रोबोट और पावर इन्वर्टर के आयात पर सख्ती बढ़ा दी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे उपकरण देश की साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। इस फैसले का असर चीन की बड़ी तकनीकी कंपनियों पर पड़ेगा और दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकती है।
वजह
अमेरिका ने प्रतिबंध क्यों लगाया?
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, विदेश में बने उन्नत रोबोट सप्लाई चेन को कमजोर कर सकते हैं और महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा पर असर डाल सकते हैं।
नए नियमों के तहत अमेरिका में नहीं बने कई रोबोट के लिए विशेष लाइसेंस लेना होगा।
इन नियमों के कारण चीनी कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में अपने रोबोट बेचना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो सकता है और कारोबार पर भी इसका सीधा असर पड़ने की उम्मीद है।
चिंता
किन बातों को लेकर जताई जा रही है चिंता?
अमेरिकी संचार आयोग का कहना है कि ऐसे रोबोट बड़ी मात्रा में डाटा इकट्ठा करते हैं, जिसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
अधिकारियों को आशंका है कि इनका उपयोग लोगों की निगरानी, संवेदनशील जानकारी जुटाने या दूर से रोबोट को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है।
इसी वजह से अमेरिकी सरकार इसे साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर जोखिम मान रही है और भविष्य में ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी भी रखेगी।
मॉडल
AI मॉडल भी जांच के दायरे में आए
अमेरिका रोबोट के साथ-साथ चीन के कुछ ओपन AI मॉडल पर भी कार्रवाई पर विचार कर रहा है।
इनमें किमी K3 और GLM 5.2 जैसे मॉडल शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये मॉडल कम लागत में उन्नत AI सेवाएं दे रहे हैं।
वहीं अमेरिका ने मूनशॉट AI पर दूसरे बड़े AI मॉडल का उपयोग कर अपने मॉडल तैयार करने का आरोप भी लगाया है, जिसकी अलग स्तर पर जांच जारी रहने की भी जानकारी सामने आई है।
विरोध
चीन ने किया विरोध
चीन ने इस फैसले का विरोध करते हुए अमेरिका से चीनी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई बंद करने की अपील की है।
यूनिट्री जैसी चीनी कंपनियां ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और हाल ही में एनवीडिया के साथ भी साझेदारी कर चुकी हैं।
इस फैसले से अमेरिका और चीन के बीच तकनीक और AI के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है जिसका असर वैश्विक तकनीकी बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।