संसदीय समिति का प्रस्ताव, दवाओं-मेडिकल उपकरणों पर 20 प्रतिशत तक हो मुनाफा
एक संसदीय समिति ने दवाओं और मेडिकल डिवाइसेस की कीमतों पर लगाम कसने का प्रस्ताव दिया है। समिति चाहती है कि इन चीजों की कीमत, उन्हें देश में लाने के खर्च से 20 प्रतिशत से ज्यादा न बढ़ाई जाए। यह कदम कुछ बड़ी कंपनियों के भारी मुनाफे को देखकर उठाया गया है।
उदाहरण के लिए, दिल के दौरे में इस्तेमाल होने वाली एक दवा की लागत 18,000 रुपये आती है, पर मरीज को वह 50,000 रुपये में मिलती है। समिति का मानना है कि इस नियम से जरूरी इलाज आम लोगों के लिए काफी किफायती हो जाएंगे।
समिति ने डिवाइसेस पर नियंत्रण और स्थानीय विनिर्माण पर जोर दिया
समिति ने स्टेंट्स और दांतों के सामान जैसे महंगे मेडिकल डिवाइसेस पर भी कड़ा नियंत्रण रखने की बात कही है। समिति ने याद दिलाया कि पहले भी जब सरकार ने स्टेंट्स की कीमतों पर सीमा लगाई थी, तो उनके दाम काफी कम हो गए थे।
इसके साथ ही, समिति चाहती है कि पेसमेकर और PET स्कैनर्स जैसे जरूरी डिवाइसेस भारत में ही बनाए जाएं। इसके लिए सरकार को सलाह दी गई है कि वह सब्सिडी दे और क्वालिटी की जांच को बेहतर बनाए। ऐसा करने से लोगों को ये डिवाइसेस आसानी से मिल पाएंगे और काला बाजार भी नहीं पनपेगा।