केरलम में खामोश हो रही प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट, क्या है वजह?
केरलम के दलदलों, तटों और जंगलों में कभी ग्रेटर सैंड प्लोवर और नॉर्दर्न पिंटेल जैसे प्रवासी पक्षियों की खूब चहचहाहट रहती थी। ये पक्षी आर्कटिक जैसे दूर-दराज के इलाकों से हर साल हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय कर यहां आते थे। लेकिन हाल के सर्वे बताते हैं कि इनकी गिनती में अब तेजी से गिरावट आ रही है। कुछ प्रजातियां तो अब बिल्कुल दिखना बंद हो गई हैं।
विशेषज्ञों ने बताए कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका एक बड़ा कारण पक्षियों के रहने की जगहों का खत्म होना है। तटीय कटाव, दलदलों को नुकसान पहुंचाना और इंसानी गतिविधियों का बढ़ता दखल इसकी बड़ी वजह हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन भी उनके आर्कटिक में मौजूद प्रजनन स्थलों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।
कोल्लम बर्डिंग बटालियन के महासचिव और केरल बीचकॉम्बिंग के राज्य समंवयक एम्पडी सुगथन ने चिंता जताते हुए कहा है कि ये पक्षी प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए, अगर हम चाहते हैं कि ये पक्षी लगातार हमारे इलाकों में आते रहें, तो उनके प्रवास के रास्तों पर पड़ने वाले आवासों को बचाना बहुत ज़रूरी है।