नौसेना को मिलेगी 1,000 किलोमीटर की मारक क्षमता, दुश्मन की पकड़ से दूर रहकर वार करेंगे 'स्मार्ट ड्रोन'
भारतीय नौसेना अपने बेड़े में जहाज से लॉन्च होने वाले ऐसे ड्रोन शामिल करने जा रही है, जो 1,000 किलोमीटर तक दुश्मन को निशाना बना सकेंगे। आप इन्हें ऐसे 'लॉइटरिंग म्यूनिशंस' की तरह समझ सकते हैं, जो दुश्मन के इलाके में मंडराते रहेंगे और फिर सटीक हमला करेंगे। लाल सागर जैसे इलाकों में हाल ही में हुए ड्रोन हमलों जैसे नए खतरों से निपटने के लिए इनकी खास जरूरत महसूस की जा रही है।
रक्षा मंत्रालय ने 12 अगस्त को आधिकारिक तौर पर इसके लिए टेंडर जारी कर दिया है। इस पहल का मकसद युद्धपोतों को लंबी दूरी तक मार करने की ताकत देना है, ताकि वे दुश्मन की मिसाइलों की पहुंच से बाहर रहकर ही हमला कर सकें।
मंत्रालय ने 9 घंटे तक हवा में रहने वाले GNSS-रेसिलिएंट ड्रोन की मांग की
इन ड्रोनों को ऐसे बनाया गया है कि ये लंबे समय तक उड़ सकें। ये 9 घंटे तक लगातार हवा में रह सकते हैं और 200 नॉट से भी ज्यादा की तेज रफ्तार से नीचे आ सकते हैं। ये दिन-रात किसी भी समय एकदम सटीक वार कर सकते हैं। इनकी सबसे खास बात ये है कि GNSS सिग्नल (जैसे GPS) को जाम कर दिया जाए या गलत सिग्नल भेजकर गुमराह करने की कोशिश भी की जाए, तब भी इनकी मारक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
एक अकेला ऑपरेटर एक मॉड्यूलर कंट्रोल कंसोल की मदद से दस ड्रोन तक को एक साथ चला पाएगा। इस कंट्रोल कंसोल का इस्तेमाल जहाज पर या किसी भी जमीनी बेस से किया जा सकेगा। इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय की योजना है कि ये उपकरण 'बाय इंडियन-IDDM' (भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित) या 'बाय इंडियन' श्रेणियों के तहत ही खरीदे जाएं। ऐसा इसलिए, ताकि इन ड्रोनों का डिजाइन और निर्माण देश के अंदर ही हो, जिससे भविष्य में नौसेना के लिए घरेलू तकनीक को और बढ़ावा मिल सके।