दिल्ली हाई कोर्ट ने महीने के पहले और तीसरे शनिवार को होने वाली सुनवाई रोकी
दिल्ली हाई कोर्ट ने हर महीने की पहली और तीसरी शनिवार को होने वाली अदालती कार्यवाही को फिलहाल रोक दिया है। यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के महीनों तक चले विरोध के बाद उठाया गया है, जिसने वकीलों पर काम के बढ़ते बोझ और थकान की चिंता जताई थी। अब मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने एक समिति गठित की है, जो इस बात पर गौर करेगी कि शनिवार को सुनवाई करना कितना व्यावहारिक और सही है।
वकीलों ने थकान की वजह से अप्रैल के शनिवार का बहिष्कार किया
शनिवार को अदालत में सुनवाई कराने का यह विचार सबसे पहले दिसंबर 2025 में सामने आया था। यह भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत के सुझाव से प्रेरित था। हालांकि, कई वकीलों ने इस पर आपत्ति जताई थी। उन्हें डर था कि इससे काम का बोझ बढ़ेगा, थकान होगी और लंबे समय में कार्यक्षमता घटने के अलावा कोई फायदा नहीं होगा।
इसी विरोध के चलते, दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों ने अप्रैल में कुछ शनिवार को काम का बहिष्कार भी किया। इस कदम से उन्होंने साफ कर दिया था कि उन्हें इस बदलाव में कोई खास फायदा नहीं दिख रहा था।