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क्या वंदे मातरम के अपमान पर अब जेल होगी? जानिए संसद का नया विधेयक
वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर गणतंत्र दिवस परेड पर कर्तव्य पथ पर निकली थी झांकी (फाइल तस्वीर)

क्या वंदे मातरम के अपमान पर अब जेल होगी? जानिए संसद का नया विधेयक

लेखन गजेंद्र
Jul 17, 2026
11:33 am

क्या है खबर?

केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने के बाद अब उसे कानूनी संरक्षण देने जा रही है। यह संरक्षण अभी तक राष्ट्रगान को प्राप्त है। भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी है। विधेयक संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। क्या विधेयक लागू होने के बाद 'वंदे मातरम' के अपमान पर जेल की सजा होगी? आइए, जानते हैं।

विधेयक

क्या है राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971?

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 को 23 दिसंबर, 1971 को पारित किया गया था। इसका उद्देश्य देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान रोकना है।

यह कानून राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), भारत के संविधान और राष्ट्रगान (जन गण मन) के अपमान को रोकने के लिए बनाया गया था।

कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करना और नागरिकों में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना है।

कानून के उल्लंघन अपमान पर अधिकतम 3 साल की जेल और जुर्माना है।

विधेयक

सरकार क्यों ला रही है राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2026?

यह प्रस्तावित संशोधन विधेयक केंद्र सरकार द्वारा 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में बढ़ावा देने और इसकी ऐतिहासिक विरासत को याद करने के व्यापक प्रयासों के बीच आया है।

संशोधन से राष्ट्रीय सम्मान के अपमान के प्रावधानों को वंदे मातरम पर भी लागू किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अब राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का जानबूझकर अपमान सजा दिलाएगी।

अभी तक 'वंदे मातरम' के अपमान पर सजा का कोई प्रावधान नहीं था।

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गायन

विधेयक लागू होने के बाद क्या होगा?

सरकार जो संशोधन विधेयक ला रही है, उसमें 'वंदे मातरम' को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव नहीं है बल्कि उसके गायन को रोकना या जानबूझकर अपमान करने पर 3 साल की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

जनवरी में गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसके बाद से सभी कार्यक्रमों और स्कूलों में इसका गायन हो रहा है।

प्रस्तावित संशोधन से 'वंदे मातरम' को अधिक मान्यता और कानूनी संरक्षण मिलेगा।

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विधेयक

वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर सरकार की पहल

इससे पहले, केंद्र सरकार ने इस साल की शुरूआत में 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने पर एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया था, जिसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान को मान्यता दी गई।

सरकार ने मंत्रालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी निकायों को सांस्कृतिक कार्यक्रम, चर्चाएं और सार्वजनिक आयोजन के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वंदे मातरम की भूमिका को उजागर किया जा सके।

सरकार ने जनता की व्यापक भागीदारी का भी आग्रह किया है।

जानकारी

वंदे मातरम का गौरव

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 'वंदे मातरम' 1875 में लिखा, जिसे 1882 में अपने उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित किया। यह सबसे पहले 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने गाया, जो बाद में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक शक्तिशाली नारा बन गया।

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