प्रधानमंत्री ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई, हरियाणा के जींद-सोनीपत के बीच चलेगी
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई है। ये ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत स्टेशन के बीच 89 किलोमीटर के मार्ग पर चलेगी। इस दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी भी मौजूद रहे। इसी के साथ भारत हाइड्रोजन से ट्रेन चलाने वाला दुनिया का 5वां देश बन गया है। अभी तक ये तकनीक जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के पास ही थी।
ट्रेन
ट्रेन में 10 कोच, 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी रफ्तार
इस ट्रेन में 10 कोच हैं। हर कोच में 32 सीटें होंगी। एक बार में ट्रेन में 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे।
14 स्टेशनों के बीच अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। हालांकि, ये 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में भी सक्षम है।
किराया 5 से लेकर 25 रुपये तक होगा।
ट्रेन रविवार को छोड़कर हफ्ते के बाकी सभी 6 दिन चलेगी।
खासियत
क्या है ट्रेन की खासियत?
यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या कोयले वाली ट्रेनों की तुलना में 60 प्रतिशत कम शोर उत्पन्न करती है, जिससे यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
इन ट्रेनों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे धुआं या प्रदूषण बिल्कुल नहीं होता। इससे वातावरण को नुकसान नहीं होता और ट्रेन चलाने का खर्च भी कम होता है।
इनमें से केवल भाप निकलती है, जो पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।
तरीका
रेल मंत्री ने बताया कैसे चलती है ट्रेन
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "इसका प्रोपल्शन सिस्टम इलेक्ट्रोलाइसिस की प्रक्रिया से पानी से हाइड्रोजन बनाकर काम करता है। इसके बाद हाइड्रोजन को फ्यूल सेल के जरिए बिजली में बदला जाता है। जब फ्यूल सेल बिजली बनाता है, तो उसका इस्तेमाल ट्रेन की मोटरों को चलाने के लिए किया जाता है। पूरी प्रक्रिया इसी तरह काम करती है। यह बहुत ही साफ-सुथरा तरीका है, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन बिल्कुल नहीं होता। केवल पानी की बूंदें निकलती हैं।"
जिंद
जिंद और सोनीपत के बीच ही क्यों चलाई जा रही है ट्रेन?
इस मार्ग पर पहले से डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेनें चल रही थीं, जिससे नया रेल सेट बनाने के बजाय मौजूदा रैक को ही हाइड्रोजन रैक में आसानी से बदला जा सकता था।
यह बिना इलेक्ट्रिफिकेशन वाला हिस्सा ट्रेन को हर दिन 2 चक्कर लगाने के लिए अनुकूल है।
3,000 किलोग्राम भंडारण क्षमता वाले हाइड्रोजन उत्पादन और ईंधन संयंत्र को जिंद में स्थापित करना भी आसान था।
इन जगहों की दिल्ली से नजदीकी भी एक कारण थी।