विदेश में पढ़ने की चाहत रखने वाले आधे से अधिक युवा छोटे शहरों से
हाल ही में एक चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है। विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले आधे से ज्यादा भारतीय छात्र अब केवल बड़े मेट्रो शहरों से नहीं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं।
असल में, हाइब्रिड लर्निंग, पाथवेज प्रोग्राम्स और यूरोप में पढ़ाई के सस्ते विकल्पों के चलते विदेश में शिक्षा हासिल करना अब कहीं ज्यादा सुलभ हो गया है।
सबसे अच्छी बात यह है कि बड़े शहरों के छात्रों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों के छोटे कस्बों के छात्रों के लिए भी विदेश में पढ़ाई के रास्ते खुल गए हैं।
जर्मनी की कम ट्यूशन फीस भारतीय छात्रों को लुभा रही
यूरोप, खासकर जर्मनी, इस समय भारतीय छात्रों की पहली पसंद बना हुआ है।
जर्मनी के सरकारी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की फीस बहुत कम है। कुछ जगहों पर तो यह सालाना मुफ्त से लेकर करीब 3 लाख रुपये तक ही होती है।
इसके अलावा, पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी ढूंढने के लिए मिलने वाला 18 महीने का पोस्ट-स्टडी जॉब-सीकर वीजा उन भारतीय स्नातकों के लिए एक बड़ा आकर्षण है जो विदेश में नौकरी करना चाहते हैं।
अपग्रेड स्टडी अब्रॉड के प्रेसिडेंट अमित गर्ग बताते हैं कि हाइब्रिड लर्निंग और पाथवेज प्रोग्राम्स छोटे शहरों के छात्रों को अपने सपनों को पूरा करने के अवसर दे रहे हैं।