एक गलती ने अटकाया था काम, अब हाई कोर्ट ने दंपत्ति को फिर दिलाई गोद लेने की प्राथमिकता
एक दंपत्ति गोद लेने के रेफरल को स्वीकार करने की समय सीमा से चूक गया था। यह सब एक मेडिकल रिपोर्ट को लेकर हुई उलझन के कारण हुआ था। लेकिन अब कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनकी प्राथमिकता बहाल कर दी है।
दंपत्ति ने जनवरी 2020 में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) में रजिस्ट्रेशन कराया था। पिछले दिसंबर में उन्हें 5 साल की एक बच्ची के लिए चुना गया था, लेकिन 48 घंटे की तय समय सीमा के भीतर जवाब न दे पाने के कारण वे अपना स्थान खो बैठे थे।
कोर्ट ने संयुक्त आयु की पात्रता पर मुहर लगाई
कोर्ट ने पुष्टि की कि दंपत्ति की कुल उम्र (108 साल) भारत के गोद लेने संबंधी नियमों के दायरे में आती है। इसके साथ ही कोर्ट ने दंपत्ति को अपनी होम स्टडी रिपोर्ट फिर से जांच कराने की इजाजत दी है। हालांकि, जिस बच्ची के लिए उन्हें पहले चुना गया था, उसे अब कोई और गोद ले चुका है, फिर भी दंपत्ति भविष्य में किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए लिस्ट में सबसे ऊपर ही रहेंगे।