बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा- विधवा को गोद लेने के लिए पति की सहमति जरूरी नहीं
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि हिंदू विधवा को बच्चा गोद लेने के लिए अपने दिवंगत पति की पूर्व इजाजत की जरूरत नहीं होती।
कोर्ट ने यह बात हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA), 1956 के तहत कही है।
दरअसल, यह मामला एक महिला का था, जिसने 1971 में एक बच्चे को गोद लिया था, लेकिन उसके दिवंगत पति के रिश्तेदारों ने इस गोद लेने को चुनौती दी थी। उनका दावा था कि परिवार की संपत्ति पर उनका हक बनता है।
कोर्ट ने दिया यह तर्क
कोर्ट ने कहा है कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA) पुराने हिंदू कानूनों और रिवाजों से कहीं ज्यादा अहम है। इसलिए, जो पुराने रिवाज कहते थे कि विधवा को पति की मंजूरी चाहिए, वे अब लागू नहीं होते।
HAMA की धारा 8 के मुताबिक, एक विधवा अकेले बच्चा गोद ले सकती है, वहीं धारा 12 यह सुनिश्चित करती है कि गोद लिया गया बच्चा परिवार का पूरा सदस्य बन जाता है, जिसमें दिवंगत पति को भी उसका कानूनी पिता माना जाता है।
इसके अलावा, कोर्ट ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) को भी निर्देश दिया है कि संपत्ति से जुड़े, जो भी मामले लंबित हैं, उन्हें जल्द से जल्द निपटाया जाए।