होटल में वारदात, ट्रायल कोर्ट से राहत और अब दोषी; तरुण तेजपाल मामले में कब-क्या हुआ?
क्या है खबर?
करीब 13 साल तक देश की चर्चित आपराधिक सुनवाई में शामिल रहे तरुण तेजपाल मामले में आखिरकार फैसला आ गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने आज ट्रायल कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को बरी कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने तेजपाल को बलात्कार के मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। आइए समझते हैं मामले में कब-क्या हुआ।
मामला
सबसे पहले जानिए क्या है यौन शोषण का मामला?
मामले की शुरुआत 7 नवंबर, 2013 को गोवा की एक प्रतिष्ठित होटल में हुई। तब तेजपाल तहलका मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ थे।
तेजपाल की एक महिला सहकर्मी ने आरोप लगाए कि 7 और 8 नवंबर को तेजपाल ने होटल की लिफ्ट में उनके साथ यौन उत्पीड़न किया।
बाद में पीड़िता ने अपने कुछ सहयोगियों को घटना की जानकारी दी और तहलका की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को भी अवगत कराया गया।
FIR
23 नवबंर, 2013 को तेजपाल के खिलाफ हुई FIR
इस बीच तेजपाल ने भी एक ईमेल में अपने व्यवहार को 'शर्मनाक भूल' बताते हुए पीड़िता से माफी मांगी। बाद में यही ईमेल सबूत के तौर पर इस्तेमाल हुआ।
23 नवंबर, 2013 को गोवा पुलिस ने तेजपाल के खिलाफ FIR दर्ज की। उन पर बलात्कार, यौन उत्पीड़न, जबरन बंधक बनाने और जबरन कैद करने का आरोप लगाया गया। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद 30 नवंबर, 2013 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
2014
2014 में पेश हुई चार्जशीट
फरवरी, 2014 में गोवा क्राइम ब्रांच ने 2,800 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें करीब गवाहों के बयान, होटल के CCTV फुटेज, ईमेल, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज शामिल थे।
जुलाई, 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को सशर्त जमानत दे दी। उन्हें पासपोर्ट जमा करने को कहा गया। इसके बाद मामला ट्रायल की ओर बढ़ा।
सितंबर 2017 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने तेजपाल के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए।
बरी
2021 में बरी हो गए थे तेजपाल
ट्रायल कोर्ट में करीब 8 साल सुनवाई हुई। 21 मई, 2021 को गोवा की जिला एवं सत्र अदालत ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया.।
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। 527 पन्नों के फैसले में कोर्ट ने पुलिस जांच में हुई कथित कमियों की ओर इशारा किया।
इस फैसले के बाद गोवा सरकार ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया।
हाई कोर्ट
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?
गोवा सरकार ने हाई कोर्ट में दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और पीड़िता से ऐसे सवाल पूछने की अनुमति दी जो उसकी गरिमा के खिलाफ थे।
वहीं, तेजपाल के वकीलों ने तर्क दिया कि बरी होना साक्ष्यों का सही आकलन था और अभियोजन पक्ष आपराधिक दोषसिद्धि के लिए जरूरी मानक पूरा नहीं कर पाया था।
7 दौर की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने 30 जुलाई, 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया।
फैसला
13 साल बाद आया फैसला
आज हाई कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि तेजपाल को बरी करने का फैसला उचित नहीं है और निचली अदालत के फैसले को पलट दिया।
हाई कोर्ट ने माना कि निचली अदालत ने सबूतों की बजाय घटना के बाद पीड़िता के व्यवहार पर ज्यादा ध्यान दिया और तेजपाल के माफी मांगने वाले ईमेल जैसे सबूतों को नजरअंदाज किया।
कोर्ट ने तेजपाल को IPC की धारा 376(2), 376(2), 354A और 354B के तहत दोषी माना।