मंत्री नहीं, तो नतीजे नहीं? तमिलनाडु में 12वीं के छात्रों पर मंडराया था संकट
इस साल तमिलनाडु में 12वीं कक्षा के नतीजे लगभग टलने वाले थे। इसकी वजह यह थी कि स्कूल शिक्षा मंत्री का पद खाली पड़ा था। 2018 से यह परंपरा चली आ रही है कि स्कूल शिक्षा मंत्री ही इन नतीजों का ऐलान करते हैं। चुनावों के बाद सरकार न बन पाने के कारण, अधिकारियों ने कहा था कि नतीजों की तारीख बिल्कुल आखिरी मौके पर बताई जाएगी। इससे छात्रों के साथ-साथ उनके माता-पिता भी काफी परेशान और चिंतित थे।
आलोचना के बाद तमिलनाडु में 12वीं के नतीजे समय पर जारी
नतीजों में हो रही इस देरी से छात्रों को डर था कि वे कॉलेज में दाखिले की आखिरी तारीख गंवा सकते हैं। शिक्षाविदों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से जमकर आलोचना सामने आने के बाद, नतीजों को समय पर जारी कर दिया गया। राज्यपाल आरलेकर ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया और जोर दिया कि छात्रों का भविष्य राजनीतिक प्रक्रियाओं पर निर्भर नहीं होना चाहिए। इसके बाद, नतीजों के ऐलान को राजनीति से परे रखने की मांग भी तेज हो गई।