चुनाव आयोग से जुड़े कानून पर सुप्रीम कोर्ट का सरकार को करारा जवाब
सर्वोच्च न्यायालय 2023 में लाए गए एक कानून की समीक्षा कर रहा है, जिसने देश के शीर्ष चुनाव अधिकारियों के चयन के तरीके में बदलाव किया है।
इस कानून के बाद, अब चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है। इस दौरान, न्यायाधीशों ने संसद को टालमटोल करने पर फटकार लगाते हुए इसे "चुने हुए लोगों की निरंकुशता" बताया है।
याचिकाकर्ताओं ने चेतावनी दी- चुनाव आयोग की स्वायत्तता खतरे में
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून चुनाव आयोग की आजादी को खतरे में डालता है, क्योंकि सरकार के दबदबे वाले पैनल शॉर्टलिस्ट को अनदेखा करके अपनी पसंद के लोगों को चुन सकते हैं। उनका तर्क है कि यह कदम उन पिछले अदालती फैसलों के उलट है, जिनका मकसद चुनावों को निष्पक्ष और राजनीतिक दखलंदाजी से दूर रखना था।
यहां तक कि विपक्षी नेता राहुल गांधी ने भी हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के दौरान औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी और मांग की थी कि जब तक अदालत इस मामले पर फैसला नहीं सुना देती, तब तक यह नियुक्ति रोक दी जाए।