
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की निर्भया के दोषी की पुनर्विचार याचिका, फांसी की सजा बरकरार
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड के दोषी अक्षय ठाकुर की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने कहा कि दोषियों को ट्रायल के दौरान पूरा मौका दिया गया था। जांच में कोई खामी नहीं मिली।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे कोई ग्राउंड नहीं है, जिसके आधार पर याचिका को खारिज किया जा सके, दलीलों में भी कुछ नया नहीं है।
तीन जजों की बेंच ने आज सुबह सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
ट्विटर पोस्ट
फैसले पर निर्भया की मां ने जताई खुशी
2012 के दिल्ली गैंगरेप पीड़िता की मां आशा देवी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी की समीक्षा याचिका खारिज करने पर एएनआई से कहा: मैं बहुत खुश हूं।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 18, 2019
(फ़ाइल तस्वीर) pic.twitter.com/k1zoXGjPA8
फिर से याचिका
दया याचिका दायर करेगा दोषी अक्षय
अक्षय के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोषी राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर करना चाहता है और इसके लिए उसे तीन सप्ताह का समय चाहिए।
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दया याचिका के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाना चाहिए।
इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को दया याचिका दायर करने के लिए पहले से निर्धारित समय दिया जा सकता है।
दलील
दोषी के वकील ने क्या दलील दी?
इससे पहले पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान दोषी के वकील एपी सिंह ने जांच पर सवाल उठाए थे। उन्होंने तिहाड़ के पूर्व जेलर की किताब का जिक्र किया, जिसमें दूसरे दोषी रामसिंह की आत्महत्या पर सवाल उठाए गए थे।
इस पर जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि ट्रायल पूरा होने के बाद कोई किताब लिखे, यह खतरनाक ट्रेंड है। उन्होंने ट्रायल के दौरान यह बात क्यों नहीं बताई। बाद में किसी के लिखने का कोई मतलब नहीं है।
दलील
सॉलिसिटर जनरल ने मांगी फांसी
पुनर्विचार याचिका पर दलील देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इसे खारिज किया जाना चाहिए। निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट ने इसमें फैसला सुना दिया है। ऐसे में इस पुनर्विचार याचिका को खारिज किया जाना चाहिए।
मेहता ने कहा कि यह फांसी के लिए फिट मामला है। यह मानवता के खिलाफ हमला था। इसमें तुरंत फैसला होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोषी किसी प्रकार की सहानुभूति का हकदार नहीं है और उसे फांसी होनी चाहिए।
दलीलें
गरीब होने के कारण दी जा रही अक्षय का फांसी- वकील
दोषी अक्षय के वकील सिंह ने कहा कि निर्भया के दोषियों को लटकाने की इतनी जल्दबाजी क्यों हो रही है। उन्होंने दलील दी कि जब देश मे इतने लोगों की फांसी लंबित है। दया याचिका दाखिल होने के बाद भी उनको ही लटकाने की जल्दी और हड़बड़ी क्यों है।
उन्होंने कहा कि यह सब दबाव में हो रहा है। गरीब होने के कारण दोषी अक्षय को फांसी दी जा रही है।
जानकारी
राष्ट्रपति के पास लंबित है दूसरे दोषी की दया याचिका
निर्भया के साथ गैंगरेप और हत्याकांड में दोषी विनय शर्मा ने फांसी की सजा से बचने के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी है। दिल्ली सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति से इस याचिका को खारिज करने की सिफारिश की है।
मामला
क्या था निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड मामला?
आरोपियों ने इस दौरान हैवानियत की सारे हदें पार कर दी थीं और बुरी तरह से घायल निर्भया और उसके दोस्त को सड़क किनारे फेंक कर भाग गए थे।
छात्रा का पहले सफदरजंग अस्पताल में इलाज चला, लेकिन कुछ दिन बाद सिंगापुर शिफ्ट कर दिया जहां उसकी मौत हो गई।
इस मामले में कुछ छह लोग दोषी थे, जिनमें से एक नाबालिग था। एक दोषी ने आत्महत्या कर ली और चार फांसी की सजा पाए हुए हैं।