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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की

लेखन गजेंद्र
Jun 12, 2026
01:32 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और एएस चंदुरकर की पीठ ने अनुच्छेद-329 के तहत संवैधानिक रोक का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव संबंधी विवादों में कानून कह चुका है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद चुनाव याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने उन्हें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दायर चुनाव याचिका में इसे उठाने की स्वतंत्रता दी।

याचिका

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, "यह व्याख्या कि अगर कोर्ट नामांकन पत्र खारिज होने पर हस्तक्षेप कर सकता है, जबकि अन्य लोगों को चुनाव याचिका दायर करने की अनुमति दी जाए, तो यह उचित नहीं है। इस स्थिति में हम ऐसा करने के इच्छुक नहीं हैं और अतः याचिका खारिज करते हैं।" कोर्ट ने कहा कि एक बार किसी उम्मीदवार का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा खारिज कर दिए जाने के बाद, उचित उपाय चुनाव आयोग से संपर्क करना है।

तर्क

याचिकाकर्ता ने क्या दिया तर्क?

नटराजन के वकील ने तर्क दिया कि रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने 9 जून को नटराजन का नामांकन इस आधार पर खारिज कर दिया कि उन्होंने अपने फॉर्म 26 हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में उनके खिलाफ दायर एक निजी शिकायत का खुलासा नहीं किया, जबकि उन्हें इस संबंध में समन प्राप्त हुआ था। पीठ ने सवाल उठाया कि क्या अदालत चुनावी प्रक्रिया के इस चरण में हस्तक्षेप कर सकती है और कोर्ट ने इस पर उदाहरण भी मांगा।

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सुनवाई

कोर्ट ने कहा- दलील स्वीकार करना अपवाद होगा

कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ता की दलील स्वीकार करना संवैधानिक व्यवस्था में एक ऐसा अपवाद जोड़ना होगा जिसका प्रावधान स्वयं संविधान में नहीं है।" कोर्ट ने आशंका जताई कि कुछ मामलों में नामांकन अस्वीकृति को चुनौती देने की अनुमति देने वाली कोई भी व्याख्या, जबकि अन्य उम्मीदवारों को चुनाव याचिका के वैधानिक उपाय तक सीमित करना, स्थापित संवैधानिक स्थिति के विपरीत होगी और इसे प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। पीठ ने त्रुटिपूर्ण नामांकन पर कोर्ट के हस्तक्षेप की दलील खारिज कर दी।

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आग्रह

नामांकन खारिज होने पर केवल चुनाव याचिका ही सुनवाई योग्य- कोर्ट

नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने पूरी तरह से मनमाने ढंग से कार्रवाई की है। उन्होंने कोर्ट से हस्तक्षेप का आग्रह करते हुए कहा कि सुशासन के लिए यह आवश्यक है कि चुनावी प्रक्रियाओं को कानून के अनुसार कार्य करने की अनुमति दी जाए। न्यायालय ने स्थापित कानून का हवाला दिया कि एक बार नामांकन खारिज हो जाने के बाद, केवल चुनाव याचिका ही सुनवाई योग्य होती है।

विरोध

याचिका में विरोध में क्या दिया गया तर्क?

नटराजन की याचिका के विरोध में भाजपा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और चुनाव आयोग की ओर से पेश डीएस नायडू ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि चुनाव लड़ने का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है, न कि मौलिक अधिकार। मध्य प्रदेश की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हस्तक्षेप की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि राज्य का चुनाव से कोई लेना-देना नहीं।

विवाद

क्या है मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला?

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की इकलौती उम्मीदवार नटराजन ने नामांकन दाखिल किया था, जिसे 9 जून को रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया। भाजपा की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी के प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी ने शिकायत की थी कि नटराजन ने अपने हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले का विवरण नहीं दिया। चुनाव आयोग में भी कांग्रेस की सुनवाई नहीं हुई। नामांकन रद्द होने पर केवट निर्विरोध जीत गए।

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