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सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची के बलात्कार मामले में गुरुग्राम पुलिस को लगाई फटकार, कहा- रवैया शर्मनाक
गुरुग्राम में 4 वर्षीय बच्ची के बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई है

सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची के बलात्कार मामले में गुरुग्राम पुलिस को लगाई फटकार, कहा- रवैया शर्मनाक

लेखन आबिद खान
Mar 25, 2026
03:38 pm

क्या है खबर?

हरियाणा के गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के साथ कथित बलात्कार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा, "यह शर्मनाक है कि हरियाणा पुलिस ने 4 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता से खुद जाकर मुलाकात करने के बजाय उसे थाने बुलाया।" कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने आरोपियों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए और उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।

SIT

कोर्ट ने किया SIT का गठन

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने गुरुग्राम पुलिस और हरियाणा राज्य द्वारा प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट पर भी नाराजगी जताई। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय SIT का गठन किया है और गुरुग्राम पुलिस से जांच को SIT को सौंपने का निर्देश दिया। SIT में सभी 3 लोग हरियाणा कैडर की महिला IPS अधिकारी हैं। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को SIT को जल्द से जल्द नोटिफाई करने का निर्देश दिया है।

बाल कल्याण समिति

बाल कल्याण समिति को भी कारण बताओ नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने जांच में लापरवाही बरतने के आरोपी गुरुग्राम पुलिस के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने गुरुग्राम बाल कल्याण समिति के सदस्यों को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। समिति के सदस्यों से पूछा गया है कि उन्हें पद से क्यों न हटाया जाए। कोर्ट ने गुरुग्राम जिला जज को आदेश दिया है कि मामले की सुनवाई POCSO कोर्ट की वरिष्ठ महिला न्यायिक अधिकारी को सौंपी जाए।

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टिप्पणियां

कोर्ट के आदेश की बड़ी टिप्पणियां

पुलिस द्वारा अपनाई गई असंवेदनशील, लापरवाह, गैरजिम्मेदार और पूरी तरह से गैरकानूनी जांच पद्धति के कारण बच्चे का आघात बढ़ गया। कमिश्नर से लेकर सब इंस्पेक्टर तक पूरे पुलिस बल ने यह साबित करने की हर संभव कोशिश की कि कोई सबूत नहीं है या माता-पिता की बातें बेतुकी हैं। पुलिस स्पष्ट रूप से अनजान बनी है और यह बेहद चिंताजनक है। अपराध की गंभीरता को धारा 6 से धारा 10 तक कम करने में सर्वोच्च अधिकारी शामिल थे।

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बयान

कोर्ट ने कहा- ये मामला असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा

CJI ने कहा, "आपने 4 साल की बच्ची की मासूमियत पर अविश्वास जताया। अगर राज्य को कानून का सम्मान है तो उनका तुरंत तबादला होना चाहिए। आपने 15 दिन से कुछ नहीं किया। यह मामला असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा को दर्शाता है। CWC के सदस्य कौन हैं? उन्हें कौन नियुक्त करता है और उनकी योग्यता क्या है? पुलिस पीड़ित के घर क्यों नहीं जा सकती? क्या वे राजा हैं? बच्चे की पहचान उजागर करने वाले दस्तावेज हलफनामे में चिपकाए गए हैं।"

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