सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बार काउंसिल के अध्यक्ष के अनिश्चितकालीन कार्यकाल पर सवाल
क्या है खबर?
हैदराबाद के NALSAR विधि विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ सख्त निर्णय लेकर चर्चा में आए भारतीय बार काउंसिल (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में BCI के कामकाज में संरचनात्मक सुधारों की मांग करते हुए याचिका दायर की गई है, जिसमें इसके सदस्यों और अध्यक्ष के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाया गया है। याचिका अधिवक्ता एम वरधान ने दायर की है, जिनका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता संदीप पांडे और राजेश चौहान कर रहे हैं।
याचिका
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिका में अधिवक्ता अधिनियम के उस प्रावधान को चुनौती दी है, जो BCI के किसी सदस्य को उसके उत्तराधिकारी के निर्वाचित होने तक पद पर बने रहने की अनुमति देता है।
वरधान ने अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पदों के लिए 2 वर्ष का निश्चित कार्यकाल निर्धारित करने का निर्देश भी मांगा है।
याचिका में अध्यक्ष और पदाधिकारियों के कार्यकाल और उनकी संख्या पर उचित सीमा लगाने, राज्यों-क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने वाली एक तर्कसंगत रोटेशनल व्यवस्था और वित्तीय-नियामक जवाबदेही की मांग की है।
चिंता
BCI के अध्यक्ष पद को लेकर चिंता
याचिका में कोर्ट से यह निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में लगातार या अन्यथा, 3 से अधिक कार्यकाल के लिए अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद धारण करने के योग्य नहीं होगा।
याचिका में कहा गया है कि किसी भी वैकल्पिक पदनाम, अंतरिम व्यवस्था, नामांकन, समिति, पुन: चुनाव या अन्य माध्यमों से समान अधिकार ग्रहण करके प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी सीमा को दरकिनार करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
चिंता
20 राज्यों के प्रतिनिधियों ने नहीं संभाला 30 सालों से पद
याचिका के मुताबिक, वर्तमान अध्यक्ष मिश्रा नवंबर 2014 से पद पर हैं, लेकिन 28 राज्यों में 20 राज्यों के प्रतिनिधियों ने पिछले 30 वर्षों में यह पद नहीं संभाला है, जबकि बीसीआई एक राष्ट्रीय नियामक संस्था है।
याचिका में अध्यक्ष पद के लिए एक तर्कसंगत, पारदर्शी और न्यायसंगत रोटेशनल तंत्र की मांग की गई है, ताकि सभी राज्यों को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिले।
बता दें, मिश्रा BCI के अध्यक्ष होने के साथ ही भाजपा के राज्यसभा सांसद भी हैं।
घटना
क्या है NALSAR विश्वविद्यालय की घटना?
NALSAR विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को आमंत्रित किया गया था, जिसपर छात्रों के एक समूह ने विरोध कर दिया।
छात्र दिल्ली में जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर CJI के कथित "मेरे पास वीडियो देखने का समय नहीं" टिप्पणी से नाराज थे।
इसके बाद BCI अध्यक्ष ने छात्रों को बार काउंसिल में पंजीकरण से बाहर कर दिया। हालांकि, आदेश वापस ले लिया।
CJI ने BCI को छात्र-विरोधी ऐसे आदेशों के लिए फटकार लगाई।