बार काउंसिल ने CJI के बहिष्कार पर NALSAR छात्रों पर लगाया था प्रतिबंध, आदेश वापस लिया
क्या है खबर?
भारतीय बार काउंसिल (BCI) ने तेलंगाना में हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) विश्वविद्यालय के छात्रों पर लगाया गया प्रतिबंध वापस ले लिया। BCI ने विश्वविद्यालय के 2026 बैच के विधि स्नातक छात्रों के किसी भी बार काउंसिल में नामांकन पर रोक लगाई थी। दरअसल, छात्रों के एक समूह ने NALSAR विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के शामिल होने का विरोध किया था, जिसके बाद BCI ने यह कदम उठाया।
विवाद
क्या है छात्रों के विरोध का मामला?
NALSAR विधि विश्वविद्यालय के 2026 बैच के स्नातक छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को बुलाने का विरोध करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से अपने निर्णय पर पुनर्नविचार करने का अनुरोध किया था।
छात्रों का तर्क था कि दीक्षांत समारोह में संवैधानिक अधिकारों, न्याय तक पहुंच और शिकायतों के तर्कसंगत समाधान के प्रति NALSAR की प्रतिबद्धता झलकनी चाहिए।
छात्रों ने अपना ज्ञापन कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को संबोधित किया।
विरोध
CJI से क्यों नाराज हैं विश्वविद्यालय के छात्र?
विश्वविद्यालय के छात्रों का विरोध दिल्ली में 20 जुलाई को पुलिस के बर्बर हमले और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद सामने आया है।
दरअसल, 22 जुलाई को, एक वकील ने पुलिस बर्बरता से संबंधित एक याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की, जिसे CJI सूर्यकांत की पीठ के समक्ष पेश किया गया।
छात्र CJI की "हमारा और अपना समय बर्बाद न करें" और "हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते" वाली टिप्पणी से बेहद नाराज हो गए थे।
कार्रवाई
छात्रों के विरोध पर BCI ने उठाया था कदम
छात्रों का विरोध सामने आने के बाद BCI प्रमुख और भाजपा के राज्यसभा सांसद ममन कुमार मिश्रा ने कहा कि 2026 में NALSAR के छात्र को BCI द्वारा वकील के रूप में नामांकित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कानून का कोई छात्र, जो सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति आदर-सम्मान नहीं रखता, उससे जिम्मेदार-समझदार वकील, शिक्षक या न्यायाधीश बनने की अपेक्षा नहीं कर सकते।
BCI ने बयान में कहा कि ऐसे व्यक्ति हमेशा विधि पेशे पर बोझ बने रहेंगे।
फैसला
अब लिया यू-टर्न, BCI ने आदेश वापस लिया
अब गुरुवार को BCI प्रमुख मिश्रा ने एक पत्र जारी कर कहा, "विस्तृत विचार-विमर्श के बाद BCI ने NALSAR से जुड़े अपने पहले के निर्देशों में बदलाव किया है। NALSAR से 2026 में पास होने वाले सभी छात्र अब अपनी पसंद के राज्य बार काउंसिल में पंजीकरण कराने के हकदार होंगे। तथ्यों की जांच जारी रहेगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। किसी भी छात्र को उसकी गलती के बिना परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।"
ट्विटर पोस्ट
BCI के प्रमुख का पत्र
After detailed deliberation, the @barcouncilindia has modified its earlier directions concerning @NALSAR_Official.
— Manan Kumar Mishra (@MishraManan01) August 13, 2026
All 2026 passed-out students of NALSAR will now be entitled to seek enrolment with the State Bar Council of their choice. The factual inquiry will continue, and… pic.twitter.com/uJPkpHaOXj
विरोध
कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था BCI के कदम का विरोध
बार काउंसिल के प्रारंभिक आदेश पर कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और सांसद अजय माकन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।
उन्होंने कहा कि बार काउंसिल कानूनी संस्था है, जिसके प्रमुख भाजपा के मौजूदा सांसद हैं, उसने NALSAR छात्रों का नामांकन बदले की भावना से रोका है, जो पूरी तरह मनमाना, गैर-कानूनी और अस्वीकार्य है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी धमकी दी कि अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो BCI कार्यालयों और मिश्रा के आवास के बाहर प्रदर्शन होगा।