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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सुखना झील को और कितना सुखाओगे; अरावली मामले पर लिया ये फैसला
अरावली मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सुखना झील को और कितना सुखाओगे; अरावली मामले पर लिया ये फैसला

लेखन आबिद खान
Jan 21, 2026
05:15 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट में आज अरावली पहाड़ियों पर खनन से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि रोक बावजूद भी अवैध खनन चल रहा है, इससे ऐसे हालात बनेंगे, जिन्हें सुधार नहीं सकेंगे। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि वो इस मामले में विशेषज्ञ समिति का गठन करेगा। वहीं, चंडीगढ़ की सुखना झील को लेकर भी कोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाई।

टिप्पणी

कोर्ट ने कहा- खनन नहीं रुका तो स्थिति हाथ से निकल जाएगी

कोर्ट ने कहा, "अवैध खनन केवल पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता, ब्लकि इसके असर लंबे समय तक बने रहते हैं। अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया तो स्थिति हाथ से निकल सकती है। कुछ तरह की अवैध गतिविधियां अब भी जारी हैं। अवैध खनन से ऐसे हालात बन सकते हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकेगा।" इस दौरान राजस्थान सरकार की ओर से केएम नटराजन ने कहा है कि राज्य अवैध खनन रोकना तुरंत सुनिश्चित करेगा।

सुखना झील

कोर्ट ने कहा- सुखना झील में अवैध निर्माण हो रहा

पीठ ने कहा , "राज्य के अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डर माफिया सक्रिय है और आप सुखना झील को कितना सुखा देंगे। आपने झील को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया है। पंजाब में राजनीतिक दलों के समर्थन और नौकरशाहों की मिलीभगत से अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप झील पूरी तरह से नष्ट हो रही है। वहां सभी बिल्डर माफिया सक्रिय हैं।" पीठ ने हरियाणा सरकार को पिछली गलतियों को न दोहराने की चेतावनी दी।

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समिति

अरावली मामले में विशेषज्ञ समिति बनाएगा कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि वह अरावली में खनन और संबंधित मुद्दों की व्यापक और समग्र जांच के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों वाली एक विशेषज्ञ समिति का गठन करेगा। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एमिकस क्यूरी के परमेश्वर को 4 हफ्ते के भीतर खनन में विशेषज्ञता रखने वाले पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि समित कोर्ट के निर्देशन और पर्यवेक्षण में काम करेगी।

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विवाद

अरावली को लेकर क्या है विवाद?

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 20 नवंबर को अरावली श्रृंखला की 100 मीटर से नीचे की छोटी पहाड़ियों और ढलानों को 'अरावली' की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इससे इन पहाड़ियों पर खनन का रास्ता खुल गया था। कोर्ट के इस फैसले का पूरे देश में भारी विरोध हुआ था। इसके बाद केंद्र सरकार ने अरावली में खनन पर रोक लगा दी। 29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश पर रोक लगा दी।

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