केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- सोनम वांगचुक चाहते हैं कि लद्दाख नेपाल-बांग्लादेश बन जाए
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और प्रसन्ना बी वराले की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने कहा कि वांगचुक के बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। केंद्र ने उनकी हिरासत को जरूरी बताते हुए कहा कि वे लद्दाख को नेपाल और बांग्लादेश बनाना चाहतें हैं।
सुनवाई
वांगचुक युवाओं को आत्मदाह के लिए उकसा रहे थे- केंद्र
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक को जनमत संग्रह और जनमत सर्वेक्षण की मांग करके जहर फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने लद्दाख को रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र बताते हुए कहा कि वह देश की रक्षा और सीमा पर तैनात बलों के लिए आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण है। मेहता ने आरोप लगाया कि वांगचुक युवाओं को आत्मदाह के लिए उकसा रहे थे।
बचाव
केंद्र ने NSA का बचाव किया
मेहता ने कोर्ट में वांगचुक के बयान का हवाला देकर कहा कि वे क्षेत्र तय करने के अधिकार की बात करते हैं। मेहता ने कहा, "जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा होने के नाते, चीन के साथ सीमा साझा करने वाले क्षेत्र होने के नाते, आप कहते हैं कि यह मेरा अधिकार है कि मैं तय करूं कि मैं किससे संबंधित हूं या किसमें विलय करूं। यदि यह NSA हिरासत का मामला नहीं है, तो कोई भी मामला नहीं हो सकता।"
प्रदर्शन
NSA के तहत जेल में बंद हैं वांगचुक
सितंबर 2025 में लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और केंद्र शासित प्रदेश के लिए छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांगों को लेकर हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया और राजस्थान के जोधपुर केंद्रीय जेल भेज दिया गया। इससे पहले 29 जनवरी को वांगचुक ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उन्होंने अरब स्प्रिंग संबंधी बयान नहीं दिया, और उन्हें सरकार की आलोचना करने का अधिकार है।