पश्चिम बंगाल: भीड़ ने न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक घेरा, सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल के मालदा में प्रदर्शनकारियों ने चुनाव कार्यालय का घेराव कर लिया। इस दौरान SIR प्रक्रिया में जुटे 7 न्यायिक अधिकारी 9 घंटे तक अंदर बंद रहे। लोगों ने गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की। बाद में पुलिस पहुंची और चुनाव अधिकारियों को सुरक्षित जगह लेकर गई। इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने कठोर आदेश जारी होने के बाद ही कार्रवाई की।
कोर्ट
कोर्ट ने कहा- सख्त आदेश के बाद प्रशासन हरकत में आया
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा, "रात 11 बजे तक आपका कलेक्टर वहां नहीं था। मुझे रात में मौखिक रूप से बहुत सख्त आदेश देने पड़े। मुझे कड़े आदेश जारी करने पड़े तभी प्रशासन हरकत में आया। न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए कहीं से भी बल बुलाने का अधिकार हम चुनाव आयोग पर छोड़ते हैं।" CJI ने कहा कि महिला न्यायिक अधिकारी, जिनमें से एक का 5 साल का बच्चा है, उन्हें भी घंटों तक बंद रखा गया था।
पूर्व नियोजित
कोर्ट बोला- ये घटना एक सोची-समझी चाल थी
CJI ने कहा, "न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और प्रक्रिया को रोकने के लिए यह एक सोची-समझी चाल थी। घेराव दोपहर 3:30 बजे शुरू हुआ। इसके बाद रजिस्ट्रार जनरल ने अधिकारियों को सूचित किया। हालांकि, रात 8:30 बजे तक कुछ नहीं किया गया। फिर गृह सचिव से संपर्क किया गया और DGP को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ कॉल पर लाया गया। शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।"
घटना
मालदा में क्या हुआ था?
मालदा में लोगों ने चुनाव आयोग कार्यालय का घेराव किया था। ये लोग SIR प्रक्रिया में जुटे न्यायिक अधिकारियों से मिलना चाहते थे, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान 3 महिलाओं समेत 7 न्यायिक अधिकारी भूखे-प्यासे अंदर ही फंसे रहे। पुलिस ने रात करीब 12 बजे सभी लोगों को बाहर निकाला। पुलिस वाहन में ले जाते समय भीड़ ने कथित तौर पर पत्थर भी फेंके। हालांकि, किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
SIR
पश्चिम बंगाल में जारी है SIR की प्रक्रिया
दरअसल, पश्चिम बंगाल में अभी भी SIR की प्रक्रिया जारी है। करीब 60 लाख 'विचाराधीन' मतदाताओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया है। SIR प्रक्रिया के बाद राज्य से करीब 76 लाख मतदाताओं के नाम कट गए हैं। हालांकि, विचाराधीन श्रेणी वाले लाखों मतदाताओं की जांच अभी जारी है। पश्चिम बंगाल में 2 चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।