मानसून के लिए तरस रहा भारत, अब तक 46 प्रतिशत कम हुई बारिश
इस साल भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून धीमी गति से शुरू हुआ है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 20 जून तक देश में सामान्य से 46 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका सबसे ज्यादा असर मध्य भारत पर देखने को मिल रहा है। इसकी मुख्य वजह 'अल नीनो' जैसे मौसमी बदलाव और वे कमजोर हवाएं हैं जो आमतौर पर मानसूनी बारिश भारत तक लेकर आती हैं।
जून के आखिर में होगा मानसून में सुधार
'अल नीनो' जिसमें प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, पूरी दुनिया में हवाओं के पैटर्न को प्रभावित कर रहा है। इसी के चलते भारत का मानसून कमजोर पड़ रहा है। हिंद महासागर 'डाइपोल' (IOD) की स्थिति भी इस बार मानसून के लिए अनुकूल नहीं है। इसके अलावा, 'मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन' (MJO) नाम का एक और मौसमी कारक भी बारिश लाने में सहायक नहीं हो रहा है। हालांकि, IMD ने एक अच्छी खबर दी है। उन्हें उम्मीद है कि जून के आखिर तक हालात सुधर सकते हैं। अरब सागर से उठने वाली तेज हवाएं महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों में आखिरकार बारिश ला सकती हैं।