SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी रखीं दलीलें; क्या-क्या हुआ?
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट में आज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कोर्ट में दलीलें पेश कीं। इसी के साथ वे सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वालीं पहली मुख्यमंत्री बन गई हैं। ममता ने कहा कि वैध दस्तावेजों में शामिल कई दस्तावेजों को भी कथित तौर पर SIR के दौरान स्वीकार नहीं किया जा रहा है।
नाम
वकील बोले- नाम में मामूली स्पेलिंग गलती पर भी मिले नोटिस
ममता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' के तहत बताए गए आधे से ज्यादा मामलों में नाम में मामूली अंतर या स्पेलिंग की गलतियां थीं। उन्होंने कहा, "एक मामले में 2002 के रिकॉर्ड में पिता के नाम में 'कुमार' बीच का नाम था, जो 2025 में नहीं था। एक और मामले में पिता का नाम 'अलाउद्दीन खान' बंगाली में 'ख' साउंड के बिना रिकॉर्ड किया गया था, जिससे यह गड़बड़ी हुई।"
ममता की दलीलें
ममता बोलीं- लोगों को न्याय नहीं मिल रहा
बनर्जी ने कहा, "मैंने चुनाव आयोग को 6 चिट्ठियां लिखी थीं, लेकिन जवाब नहीं मिला। मैं नेता के तौर पर नहीं, बल्कि आम इंसान के तौर पर बोल रही हूं। लोगों को न्याय नहीं मिल रहा। बंद दरवाजों के पीछे न्याय रो रहा है।" इससे पहले ममता ने बोलने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगी। उन्होंने कहा कि राज्य की होने के नाते स्थिति को समझाना चाहती हैं। मुख्य न्यायाधीश ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें अनुमति दी।
दलीलें
ममता ने कहा- पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा
ममता ने कहा, "पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। असम और पूर्वोत्तर में क्यों SIR नहीं हो रहा? लोग खेती में लगे हुए हैं और उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं। BLO आत्महत्या कर रहे हैं। वे आधार के साथ एक और दस्तावेज मांग रहे। दूसरे राज्यों में कुछ भी नहीं मांगा जाता। उन्होंने चुनाव से ठीक पहले सिर्फ पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया। वे 2 महीने में कुछ ऐसा करना चाहते हैं, जिसमें 2 साल लगते हैं।"
चुनाव आयोग
चुनाव आयोग बोला- राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही
वहीं, चुनाव आयोग ने कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार SIR प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रही है। सरकार निचले स्तर के कर्मचारियों को भेज रही थी, जिनमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शामिल थे, जिनके पास दस्तावेजों को वेरिफाई करने का अधिकार नहीं था। इसके चलते माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त करने पड़े। चुनाव आयोग के खिलाफ आरोप बेवजह दुश्मनी के साथ लगाए जा रहे हैं। राज्य अधिकारी प्रक्रिया को ठीक से पूरा करने के लिए जरूरी सहयोग नहीं दे रहे हैं।"
याचिका
ममता की याचिका में क्या मांग की गई हैं?
ममता ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़े चुनाव आयोग के 24 जून, 2025 और 27 अक्टूबर, 2025 को जारी किए गए सभी आदेशों को रद्द करने की मांग की है। उनकी मांग है कि बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 की मतदाता सूची के आधार पर हीे कराए जाएं। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने सुनवाई की।
आवेदन
ममता ने दाखिल की नई अर्जी, की ये मांग
ममता ने एक नई अर्जी दाखिल की है, जिसमें चुनाव आयोग को मतदाता सूची से नाम हटाने से रोकने के लिए तुरंत निर्देश देने की मांग की गई है। आरोप है कि आयोग ने आवेदनों में मामूली गड़बड़ियों पर भी वोटरों को नोटिस जारी किए हैं। ममता ने कोर्ट से आग्रह किया कि 2022 की मतदाता सूची के नाम नहीं हटाए जाए, व्यक्तिगत सुनवाई की शर्त वापस ली जाए और कई दस्तावेजों को स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए।