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#NewsBytesExplainer: शाहपुरकंडी बांध के जरिए कैसे पाकिस्तान का पानी रोकने जा रहा भारत? 
शाहपुरकंडी बांध का काम अंतिम चरण में है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

#NewsBytesExplainer: शाहपुरकंडी बांध के जरिए कैसे पाकिस्तान का पानी रोकने जा रहा भारत? 

लेखन आबिद खान
Feb 18, 2026
12:00 pm

क्या है खबर?

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत पाकिस्तान का जल संकट बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। अब भारत एक बड़ी जल परियोजना से पाकिस्तान को सीधा झटका देने वाला है। दरअसल 31 मार्च तक शाहपुरकंडी बांध का काम पूरा हो जाएगा, जिसके बाद रावी नदी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान की ओर जाना लगभग बंद हो जाएगा। इस बांध का काम अंतिम चरण में है। आइए परियोजना के बारे में जानते हैं।

परियोजना

क्या है शाहपुरकुंडी बांध परियोजना?

शाहपुर कंडी डैम जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा पर रावी नदी पर स्थित है। इस बांध की ऊंचाई 55.5 मीटर है और इसमें 7.7 किलोमीटर लंबी जलविद्युत नहर भी बनाई गई है। इस बांध को बनाने में करीब 3,394 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इसमें से पंजाब सरकार ने 2,694 करोड़ रुपये और बाकी 700 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने दिए हैं। करीब 46 साल बाद ये परियोजना पूरी हो रही है।

टाइमलाइन

बांध को लेकर कब-क्या हुआ?

इस परियोजना की परिकल्पना 1979 में की गई थी। 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी। हालांकि, विवाद के चलते काम पूरा नहीं हुआ। 2001 में फिर परियोजना को मंजूरी मिली। 2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिला। सितंबर 2018 में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच सहमति बनने के बाद काम शुरू हुआ। 6 दिसंबर, 2018 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परियोजना को मंजूरी दी थी।

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फायदा

बांध से क्या होगा फायदा?

जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों में 32,173 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। पंजाब में लगभग 5,000 हेक्टेयर जमीन में सिंचाई आसान होगी। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के सूखाग्रस्त कठुआ और सांबा जिलों के साथ-साथ पंजाब के सीमावर्ती इलाकों को पानी उपलब्ध कराना है। बांध से पानी की बर्बादी भी रुकेगी, जो पहले माधोपुर हेडवर्क्स से होकर पाकिस्तान चला जाता था। परियोजना के जरिए बिजली उत्पादन भी होगा।

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असर

पाकिस्तान पर क्या होगा असर?

पाकिस्तान की करीब 80 प्रतिशत कृषि भूमि सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। कृषि वहां के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में करीब 25 प्रतिशत का योगदान देती है। रावी नदी के पानी पर नियंत्रण के चलते पाकिस्तान में जल प्रवाह में कमी से खेती, खाद्य सुरक्षा और बड़े शहरों की जल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है। पाकिस्तान पहले से ही भारत द्वारा सिंधु जल संधि रद्द करने से बौखलाया हुआ है।

बयान

मंत्री बोले- पाकिस्तान जा रहा पानी रोका जाएगा

जम्मू कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राना ने कहा कि जब शाहपुर कंडी बांध का काम पूरा हो जाएगा तो उसकी मदद से रावी नदी के भारत के हिस्से के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान की तरफ बहने से भी रोका जा सकेगा। राना ने कहा, "पाकिस्तान को जाने वाला अतिरिक्त पानी रोका जाएगा और ये रोका भी जाना चाहिए। कठुआ और सांबा जिले सूखाग्रस्त है और ये परियोजना हमारी प्राथमिकता है, जो कंडी इलाके में बनाया जा रहा है।"

संधि

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत ने रद्द की सिंधु जल संधि

भारत ने पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत को पत्र लिखकर संधि पर चर्चा का अनुरोध किया था। विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी। इसके तहत सिंधु घाटी में बहने वाली 3 पूर्वी नदियों (रवि, सतलज, व्यास) पर भारत, जबकि 3 पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर पाकिस्तान का अधिकार है।

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