महाराष्ट्र में बेटियों पर संकट: शहरी लिंगानुपात 885 पर पहुंचा, हरियाणा के बराबर
महाराष्ट्र के नए आंकड़ों से पता चला है कि राज्य में हर 1000 लड़कों के जन्म पर केवल 899 लड़कियां पैदा हो रही हैं। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 918 से काफी कम है। पिछले 10 सालों में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म के समय लिंगानुपात सुधरा है और अब 910 तक पहुंच गया है, लेकिन शहरों में स्थिति बिल्कुल उलटी है। शहरी इलाकों में यह अनुपात 908 से गिरकर 885 पर आ गया है। इस गिरावट के कारण महाराष्ट्र अब छत्तीसगढ़ और केरल जैसे उन राज्यों से भी पीछे रह गया है, जहां लिंगानुपात कहीं ज्यादा अच्छा है।
महाराष्ट्र के शहरों का लिंगानुपात अब हरियाणा के बराबर
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र के शहरों का लिंगानुपात (885) अब हरियाणा के पूरे राज्य के औसत के बराबर आ गया है। यह आंकड़ा बिल्कुल भी अच्छा नहीं है, क्योंकि यह राष्ट्रीय शहरी औसत 928 से काफी कम है। आमतौर पर शहरों में गांवों के मुकाबले लिंगानुपात बेहतर माना जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में हालात इसके विपरीत हैं। यहां के शहरी क्षेत्र अपने ही ग्रामीण इलाकों से पिछड़ रहे हैं।
महाराष्ट्र में 57.7 प्रतिशत जन्म सरकारी अस्पतालों में
इसी से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा यह है कि महाराष्ट्र में अधिकतर (57.7 प्रतिशत) जन्म सरकारी अस्पतालों में होते हैं। वहीं, लगभग 41 प्रतिशत जन्म निजी अस्पतालों में दर्ज किए गए हैं, जो बड़े राज्यों में दूसरा सबसे ऊंचा प्रतिशत है। राज्य की प्रजनन दर भी देश में सबसे कम दरों में से एक है, जो 1.4 है। अब लड़कियां औसतन देर से शादी कर रही हैं। साथ ही, राज्य की 10 प्रतिशत से अधिक आबादी 60 साल से ज्यादा उम्र की हो चुकी है, जिसके कारण बुजुर्गों की देखभाल की जरूरत भी बढ़ती जा रही है।