चावल पर दोहरी मार: रिकॉर्ड निर्यात और खाड़ी देशों की होड़ ने 25 प्रतिशत बढ़ाए दाम
भारत में चावल अब काफी महंगा हो गया है. बासमती और गैर-बासमती, दोनों तरह के चावल की कीमतें 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। आखिर ऐसा क्यों हुआ? खाड़ी देशों ने चावल बड़ी मात्रा में खरीदना शुरू कर दिया है ताकि वे अपने यहां स्टॉक जमा कर सकें। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण सभी को खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है, इसलिए वे ज्यादा खरीद कर रहे हैं। यह उम्मीद मत कीजिए कि चावल की कीमतें जल्दी कम होंगी। अक्टूबर या नवंबर में जब नई फसल आएगी, तब तक कीमतें ऐसी ही बनी रह सकती हैं।
भारत ने किया रिकॉर्ड निर्यात, घरेलू बाजार में कमी
वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने 65.2 लाख टन चावल का रिकॉर्ड निर्यात किया है, लेकिन इतने बड़े निर्यात की वजह से देश के अंदर चावल की सप्लाई कम हो गई है। बासमती चावल की कीमत अभी भी लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब बनी हुई है। वहीं, सोना मसूरी चावल की कीमत 52 से बढ़कर करीब 64 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। सोना मसूरी की कीमतों में इस उछाल की दो मुख्य वजहें हैं। इनमें दक्षिण भारत में बारिश का अनियमित होना और सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए चावल की खरीद शमिल हैं। कुछ जगहों पर शिपिंग में थोड़ी देरी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल की मांग अभी भी बहुत मजबूत बनी हुई है।