भारतीय शोध की डरावनी चेतावनी: 80 करोड़ भारतीयों की प्यास पर गहराया संकट
उत्तराखंड के ग्लेशियर हर साल औसतन 23.23 मीटर की दर से पिघलकर पीछे हट रहे हैं। इसमें खट्लिंग ग्लेशियर की रफ्तार तो और भी तेज है, जो हर साल 88 मीटर तक पीछे खिसक रहा है। भारतीय वैज्ञानिकों के इस शोध को 'डिस्कवर जियोसाइंस' नाम की एक पत्रिका में छापा गया है। यह अध्ययन बताता है कि हिमालय में हालात कितनी तेजी से बदल रहे हैं।
बढ़ती स्नोलाइन से गंगा बेसिन के पानी को खतरा
साल 2000 से अब तक, वह ऊंचाई जहाँ बर्फ जमा होती है, लगभग 500 मीटर ऊपर खिसक गई है। इसका सीधा मतलब है कि ग्लेशियरों को स्थिर रखने के लिए अब ताज़ी बर्फ पहले से कम मिल रही है। मिलाम ग्लेशियर के पिघलने की वजह से लगभग 47 नई ग्लेशियर झीलें भी बन गई हैं। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि ये सारे बदलाव गंगा बेसिन पर निर्भर लगभग 80 करोड़ लोगों के लिए पानी की आपूर्ति को खतरे में डाल रहे हैं। इसलिए, इन ग्लेशियरों की बेहतर निगरानी करना अब पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है।