महाराष्ट्र: आधे प्राइवेट होम्योपैथी कॉलेज 'सियासी' शिकंजे में, 3,000 सीटों पर सवाल
एक नई रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया है कि महाराष्ट्र के 72 प्राइवेट होम्योपैथी कॉलेजों में से 34 कॉलेज, यानी करीब 47 फीसदी, ऐसे ट्रस्ट या सोसाइटी द्वारा चलाए जा रहे हैं जिनका राजनीति से सीधा संबंध है। यह राजनीतिक जुड़ाव किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग दलों के नेताओं से है।
इन राजनीतिक दखल वाले कॉलेजों में करीब 3000 सीटें हैं, जो 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए राज्य की कुल सीटों का लगभग आधा हिस्सा हैं।
कॉलेजों की संख्या बढ़ी, पर सीटों में बढ़ोतरी नहीं
पिछले कुछ सालों में होम्योपैथी कॉलेजों की संख्या में काफी उछाल आया है। साल 2021 से अब तक इनकी संख्या 59 से बढ़कर 74 हो गई है। हालांकि, सीटों की बढ़ोतरी इस हिसाब से नहीं हुई है। इसकी वजह यह है कि सरकार की सख्ती के चलते नकली फैकल्टी और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मसलों पर लगाम लगाई जा रही है।
एक तरफ जहां MBBS की सीटें बहुत कम हैं और हर साल 22 लाख से भी ज्यादा छात्र इसके लिए कॉम्पिटिशन करते हैं, ऐसे में कई विद्यार्थी होम्योपैथी को एक बैकअप ऑप्शन की तरह देखते हैं। इसी वजह से ये कॉलेज काफी पॉपुलर और मुनाफे वाले बन गए हैं। कुछ कॉलेज अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके NEET की कट-ऑफ कम करवाने की भी कोशिश करते हैं।