सुप्रीम कोर्ट बोला- नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं
क्या है खबर?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच नागरिकता को लेकर उठे सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख साफ किया है। कोर्ट ने कहा कि SIR के बाद मतदाता सूची से नाम कट जाने से किसी की नागरिकता खत्म नहीं होती। कोर्ट ने ये भी साफ कहा कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का अधिकार केवल मतदाता सूची के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक सीमित है।ा
टिप्पणी
कोर्ट ने कहा- चुनाव आयोग का केवल मतदाता सूची पर नियंत्रण
कोर्ट ने कहा, "चुनाव आयोग नागरिकता का निर्णय करने वाला संवैधानिक प्राधिकरण नहीं है। अगर किसी व्यक्ति का नाम संदिग्ध नागरिकता के आधार पर मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो चुनाव आयोग का कर्तव्य है कि वह केंद्र सरकार से उसकी नागरिकता की स्थिति निर्धारित करने के लिए आवेदन करे। आयोग का मतदाता सूची पर नियंत्रण है। यह किसी को शामिल न करने का निर्णय ले सकता है, लेकिन इससे नागरिकता की स्थिति का हनन नहीं होता है।"
मामला
क्या है मामला?
दरअसल, इस याचिका में पश्चिम बंगाल में SIR से बाहर रखे गए लोगों की अपीलों की सुनवाई के लिए गठित न्यायाधिकरणों में प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 19 न्यायाधिकरणों के समक्ष अभी 34 लाख अपीलें लंबित हैं।
इसी दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने नाम हटाए गए लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्नपूर्णा योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ देने से इनकार करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है।
पीठ
नागरिकता पर फैसला चुनाव आयोग के दायरे में नहीं- कोर्ट
याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने की।
पीठ ने कहा, "बिहार SIR के अपने फैसले में हमने स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग का यह कर्तव्य है कि SIR पर फैसला आते ही उसे नागरिकता अधिनियम के तहत निर्णय हेतु मंत्रालय को भेजना होगा। ऐसा न करने पर यथास्थिति बनी रहेगी। चुनाव आयोग अनुच्छेद 9, 10, 11 और 12 के तहत नागरिकता की स्थिति में संवैधानिक प्राधिकरण नहीं है।"
पिछली टिप्पणी
कोर्ट ने कहा था- योजनाओं के हकदार होंगे SIR से बाहर हुए लोग
इसी हफ्ते हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में SIR के बाद जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे, वे अब भी कुछ कल्याणकारी योजनाओं जैसे सब्सिडी वाला राशन पाने के हकदार होंगे।
हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता का राशन कार्ड निलंबित किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।
इसके लिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया था।