नोएडा के गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
अप्रैल में नोएडा के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार हुए श्रमिकों की रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कार्यकर्ता, छात्र और कई सामाजिक संगठन इकट्ठा हुए। इस रैली का आयोजन कार्वन (कार्वन) नाम के संगठन ने किया। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान गिरफ्तारियों को 'गैरकानूनी और बेबुनियाद' बताते हुए श्रमिकों की तस्वीरें और तख्तियां लहराईं। कार्वन के केशव आनंद ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस की चार्जशीट 'झूठ का पुलिंदा' है और उसमें कोई सबूत नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ गिरफ्तार लोगों पर तो सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत केस भी दर्ज किया गया है।
विरोध प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश ने बढ़ाई मजदूरी
नोएडा में श्रमिकों का यह आंदोलन तब शुरू हुआ जब उन्होंने बेहतर वेतन और काम की अच्छी शर्तों की मांग रखी। दरअसल, यह मांग हरियाणा में मजदूरी 35 प्रतिशत बढ़ाए जाने के बाद उठी थी। शुरुआत में सब शांति से चल रहा था, लेकिन 13 अप्रैल को यहां झड़पें हुईं, जिसके बाद कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, जनता के दबाव में आकर उत्तर प्रदेश सरकार ने आखिरकार विरोध प्रदर्शन के बाद मजदूरी बढ़ा दी। अब अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्ध-कुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये तय किए गए हैं। इस तरह प्रदर्शनकारियों की एक अहम मांग पूरी हो गई है।