इंजीनियरिंग छात्र की दलील खारिज: हाई कोर्ट बोला- 2500 रुपये में गुजारा मुश्किल, देना होगा पत्नी को भत्ता
22 साल का एक इंजीनियरिंग छात्र अपनी अलग रह रही पत्नी को हर महीने 2500 रुपये का मेंटेनेंस देने से बचना चाहता था। उसने अदालत में दलील दी कि उसकी कोई कमाई नहीं है और वह अभी पढ़ाई कर रहा है। हालांकि, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उसकी इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि इस जोड़े ने कम उम्र में शादी की थी और 2023 की शुरुआत में ही उनका रिश्ता टूट गया था। ऐसे में फैमिली कोर्ट का भरण-पोषण का आदेश अभी भी बरकरार है।
कोर्ट ने कहा- 2500 रुपये गुजर-बसर के लिए मुश्किल से ही पर्याप्त
पति ने कोर्ट में दलील दी कि वह अपनी मां की विधवा पेंशन पर आश्रित है और उसकी पत्नी का परिवार आर्थिक रूप से सक्षम है। लेकिन अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि भारतीय कानून के तहत, पति की जिम्मेदारी है कि वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करे, भले ही वह नौकरी करता हो या छात्र हो। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का जिक्र करते हुए जज ने कहा कि भरण-पोषण का अधिकार (मेंटेनेंस) एक महिला का हक है, ताकि वह अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सके। जज ने यह भी टिप्पणी की कि आज की महंगाई को देखते हुए 2500 रुपये की यह राशि उसके गुजर-बसर के लिए मुश्किल से ही पर्याप्त है।