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प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी किया, पूछा- आप शंकराचार्य कैसे लिखते हैं?
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया

प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी किया, पूछा- आप शंकराचार्य कैसे लिखते हैं?

लेखन गजेंद्र
Jan 20, 2026
05:38 pm

क्या है खबर?

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके अनुयायियों के साथ पुलिस की अभद्रता का मामला तूल पकड़ रहा है। इस बीच, प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस जारी किया है और उनसे पूछा है कि वे अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं? नोटिस का जवाब 24 घंटे में जवाब मांगा गया है, जिसका स्वामी ने जवाब भेज दिया है।

नोटिस

नोटिस में प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने क्या कहा?

प्राधिकरण उपाध्यक्ष ने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के लंबित मुकदमे हवाला देते हुए पूछा है कि आप खुद को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं? नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील का भी जिक्र है, जिसमें कोर्ट ने आदेश दिया था कि अपील निस्तारित होने तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।

जवाब

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप

नोटिस में कहा गया है कि माघमेले में स्वामी द्वारा लगाए गए शिविर में बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य प्रदर्शित किया गया है, जिससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवेहलना का पता चल रहा है। प्राधिकरण ने स्वामी से कहा है कि वह 24 घंटे के अंदर स्पष्ट करें कि वह अपने नाम के आगे शंकराचार्य शब्द का प्रयोग या अपने को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में किस तरह से प्रचारित कर रहे हैं।

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जवाब

शंकराचार्य ने दिया जवाब

स्वामी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेस बुलाकर कहा कि प्रशासन और सरकार तय नहीं करेगी कि कौन शंकाराचार्य है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ही शंकराचार्य तय करते हैं और उनको 3 शंकाराचार्य में 2 पीठ के शंकाराचार्य का समर्थन है, जबकि पुरी के शंकाराचार्य मौन हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे में भी उनके विरोध का उल्लेख नहीं है। स्वामी ने कहा कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार शंकराचार्य वही है, जिसे अन्य पीठ के शंकराचार्य मान्यता देते हैं।

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ट्विटर पोस्ट

शंकाराचार्य का जवाब

समर्थन

अखिलेश ने शंकाराचार्य से बात की, कांग्रेस ने समर्थन दिया

मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने शंकाराचार्य से फोन पर बात की और उनको अपना समर्थन दिया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी मामले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सनातन परंपरा का अपमान है और साथ ही धर्माचार्यों की गरिमा पर भी सीधा हमला किया गया है। उन्होंने शंकाराचार्य को नोटिस देने पर प्रदेश सरकार को निशाने पर लिया और दोहरी नीति वाा बताया।

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