प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मनाई, बोले- देश नक्सलवाद से मुक्त हुआ
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मनाई। उन्होंने कहा कि इस साल की दिवाली विशेष हैं, क्योंकि 40-50 साल बाद ऐसी दिवाली आई है, जब देश नक्सलवाद के खिलाफ दशकों पुरानी लड़ाई जीत चुका है। उन्होंने कहा, "ये पहली दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है। ये पहली दिवाली है, जब देशवासी नक्सलवाद के भय को हरा चुके हैं। ये एक असाधारण उपलब्धि है, जिसका श्रेय आपको जाता है।"नक्स
नक्सलवाद
प्रधानमंत्री बोले- एक समय यहां घर से बाहर निकलना नामुमकिन था
प्रधानमंत्री ने कहा, "एक समय था जब देश के 200 से ज्यादा जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। शाम होने के बाद घरों से बाहर निकलना नामुमकिम हो जाता था। लोगों से वोट डालने का अधिकार भी नक्सलियों ने छीन लिया था। बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत देश का एक बड़ा हिस्सा वामपंथी उग्रवाद की चपेट में था। एक साल में 2,000 तक नक्सली हमले होते थे। 2010 में दंतेवाड़ा में CRPF के 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए।"
बड़ी बातें
प्रधानमंत्री के संबोधन की अहम बातें
जब देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तो बाहरी दुश्मन सफल नहीं हो पाते। लेकिन जब आंतरिक सुरक्षा कमजोर होती है, तो बाहरी दुश्मन सिर उठाने लगते हैं।
सीमाओं पर हमारी सेनाएं जो भूमिका निभाती हैं, वही भूमिका आप सभी सुरक्षाकर्मी देश के भीतर निभाते हैं।
उस समय की सरकारों ने नक्सलवाद को ऐसी बीमारी मान लिया था, जिसका कोई इलाज नहीं है और इसे ऐसे ही छोड़ दिया था।
परिवार
आप सभी मेरे परिवार का हिस्सा- जवानों से प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा, "आप सभी मेरे परिवार का हिस्सा हैं। इस बार मैं बस्तर के जंगलों में आपके साथ दिवाली मनाने आया हूं। यह वही इलाका है, जहां कभी नक्सलवाद का आतंक था। आपके बलिदान और समर्पण की वजह से अब इस इलाके से नक्सलवाद खत्म हो गया है और यहां विकास की नई लहर शुरू हुई है। यह उपलब्धि आप जैसे लाखों बहादुर पुरुषों और महिलाओं, हमारे सैनिकों और सुरक्षा बलों के जवानों की है।"
पिछली दिवाली
प्रधानमंत्री ने लगातार 13वीं बार जवानों संग दिवाली मनाई
प्रधानमंत्री मोदी 2014 से अब तक लगातार 13 बार जवानों के साथ दिवाली मना चुके हैं। पिछले साल उन्होंने INS विक्रांत पर दिवाली मनाई थी।
2024 में उन्होंने गुजरात के लक्की नाला, 2023 में हिमाचल के लेप्चा, 2022 में करगिल, 2021 में नौशेरा, 2020 में राजस्थान के लोंगेवाला, 2019 में राजौरी, 2018 में उत्तराखंड के हर्षिल, 2017 में गुरेज, 2016 में हिमाचल के सुमदो, 2015 में पंजाब के डोगराई और 2014 में लद्दाख के सियाचिन में दिवाली मनाई थी।