सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने और SIR की जांच की मांग
क्या है खबर?
चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक जनहित याचिका दायर कर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने और उनके नेतृत्व में हुई मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की जांच की मांग की गई है। यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है।
याचिका
याचिका में क्या की गई है मांग?
संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर याचिका में निर्देश देने की मांग है कि चुनाव आयुक्तों के बहुमत की सहमति के बिना चुनाव आयोग द्वारा लिए गए सभी निर्णय, दिशानिर्देश और सॉफ्टवेयर संशोधन अवैध घोषित किया जाए।
याचिकाकर्ता ने ज्ञानेश कुमार, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और चुनाव आयोग की महानिदेशक (सूचना प्रौद्योगिकी) सीमा खन्ना के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।
इनके खिलाफ शिकायत दर्ज करने और अभियोजन शुरू करने के निर्देश देने की मांग की है।
जांच
SIR की SIT जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने SIR के दौरान मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं को हटाए जाने की न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है।
साथ ही, वैधानिक फॉर्म-6 को बहाल करने और सभी पात्र वयस्कों को मूल वैधानिक आवश्यकताओं के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकरण करने की अनुमति देने की मांग भी शामिल है।
याचिका में CEC द्वारा अधिकारियों की मिलीभगत से किए गए कृत्यों को अवैध बताया गया है।
विवाद
क्या है विवाद?
इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार को खुलासा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार ज्ञानेश कुमार के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें अनसुना किया गया।
दोनों चुनाव आयुक्त नए मतदाताओं के पंजीयन, मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाना और जोड़ना और SIR प्रक्रिया में मतदाता का नाम वापस जोड़ने के आदेशों के खिलाफ अपील करने के मुद्दे पर असहमत थे।
इससे ज्ञानेश कुमार की मनमानी सामने आई है।