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OBC नॉन क्रीमी लेयर में बड़ा बदलाव, 8 लाख से ज्यादा आय पर नहीं मिलेगा लाभ
OBC नॉन क्रीमी लेयर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है

OBC नॉन क्रीमी लेयर में बड़ा बदलाव, 8 लाख से ज्यादा आय पर नहीं मिलेगा लाभ

लेखन आबिद खान
Mar 12, 2026
02:23 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के नॉन क्रीमी लेयर मामले में बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने कहा कि कोई उम्मीदवार OBC के क्रीमी लेयर में आता है या नॉन-क्रीमी लेयर में, यह सिर्फ आय के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा है कि अगर माता-पिता समूह 4 में सरकारी नौकरी करते हैं और उनकी आय 8 लाख रुपये सालाना से ज्यादा है, तो भी उन्हें क्रीमी लेयर में नहीं जोड़ा जाएगा।

फैसला

कोर्ट ने कहा- सिर्फ आय के आधार पर तय नहीं कर सकते 

कोर्ट ने कहा है कि अगर माता-पिता समूह 4 में सरकारी नौकरी करते हैं और उनकी आय 8 लाख रुपये से ज्यादा है, तो भी क्रीमी लेयर में नहीं जोड़ा जाएगा। साथ ही कृषि आय को भी नहीं जोड़ा जाएगा। केवल अन्य स्रोतों से आय 8 लाख सालाना से कम होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पोस्ट की श्रेणी और स्टेटस पैरामीटर का जिक्र किए बिना सिर्फ आय के आधार पर क्रीमी लेयर तय करना कानूनन टिकने लायक नहीं है।

आदेश

कोर्ट के आदेश की बड़ी बातें

कोर्ट ने कहा कि 1993 का कार्यालय ज्ञापन, जो इंद्रा साहनी फैसले के बाद जारी हुआ था, बताता है कि क्रीमी लेयर का निर्धारण मुख्य रूप से माता-पिता के पद और सामाजिक स्थिति के आधार पर होगा। कोर्ट ने कहा कि माता-पिता की वेतन आय को जोड़कर क्रीमी लेयर तय करना गलत है, इससे आरक्षण की मूल भावना प्रभावित होती है। कोर्ट ने माना कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है।

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फायदा

किन्हें मिलेगा फायदा?

कोर्ट के मुताबिक, DoPT ने 2004 में जो पत्र निकाला था, उसका पैराग्राफ 9 अब अमान्य हो गया है। इसके अनुसार बैंक/निजी नौकरी वालों के केवल वेतन को क्रिमी लेयर नहीं माना जा सकता। इसका फायदा उन लोगों को मिलेगा, जिन्हें पहले क्रीमी लेयर की गलत परिभाषा के कारण OBC आरक्षण से बाहर रखा गया था। ये लोग नौकरी तो कर रहे हैं, लेकिन सही कैडर में नहीं हैं।

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मामला

क्या है मामला?

यह विवाद उन अभ्यर्थियों से जुड़ा है, जिन्होंने OBC नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी के तहत आरक्षण का दावा किया था, लेकिन DoPT ने इनके माता-पिता की वेतन को आधार बनाकर इन्हें क्रीमी लेयर में शामिल कर दिया। इनमें से कई अभ्यर्थियों के माता-पिता बैंकों या अन्य संस्थानों में कर्मचारी थे। जिन अभ्यर्थियों के माता-पिता की आय तय सीमा से ज्यादा थी, सरकार ने उन्हें 2004 के एक पत्र का हवाला देते हुए OBC आरक्षण का लाभ देने से मना कर दिया।

प्लस

न्यूजबाइट्स प्लस

क्रीमी लेयर में OBC के ज्यादा अमीर और सामाजिक रूप से आगे रहने वाले सदस्य आते हैं, जिन्हें सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण नहीं मिलता है। इंद्रा साहनी मामले के बाद ये नियम बना, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने OBC आरक्षण को सही ठहराया था, लेकिन अमीर तबकों को इससे बाहर रखा था। फिलहाल सालाना 8 लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाले OBC परिवार को क्रीमी लेयर का हिस्सा माना जाता है और उन्हें आरक्षण नहीं मिलता।

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