आ रहा सदी का सबसे ताकतवर अल नीनो, भारत के मानसून पर बड़ा संकट
अल नीनो, प्रशांत महासागर में पानी गर्म होने वाली एक मौसमी घटना, फिर से सक्रिय हो गया है और इसका असर अब और बढ़ता जा रहा है। NOAA का अनुमान है कि 81 प्रतिशत संभावना है कि यह इस साल के आखिर तक बेहद शक्तिशाली हो जाएगा। ऐसे में, यह 1950 के दशक के बाद सबसे मजबूत अल नीनो साबित हो सकता है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अल नीनो दुनियाभर के मौसम का मिजाज बदल सकता है। इसके कारण कई इलाकों में सूखा, लू और बारिश की कमी जैसे हालात बन सकते हैं।
IMD का अनुमान: जुलाई में बारिश 94 प्रतिशत से कम होगी
इस बार मानसून कमजोर रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि जुलाई में औसत के 94 प्रतिशत से भी कम बारिश होगी। सामान्य बारिश सिर्फ राजस्थान और दक्षिण व मध्य भारत के कुछ हिस्सों में ही देखने को मिल सकती है। और चूंकि 'इंडियन ओशन डाइपोल' भी न्यूट्रल यानी तटस्थ बना हुआ है, यानी उधर से कोई मदद नहीं मिल पा रही है, तो विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल बारिश पर 'एल नीनो' का असर और भी गहरा हो सकता है।