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आपातकालीन द्वार नहीं, लगेज में ज्वलनशील पदार्थ; यमुना एक्सप्रेसवे पर बस कैसे बनी आग का गोला?
यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने की घटना में कई लापरवाहियां सामने आई है

आपातकालीन द्वार नहीं, लगेज में ज्वलनशील पदार्थ; यमुना एक्सप्रेसवे पर बस कैसे बनी आग का गोला?

लेखन आबिद खान
Sep 24, 2026
02:28 pm

क्या है खबर?

उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्लीपर बस में आग लगने के बाद 9 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई है। अब मामले में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बस में आपातकालीन द्वार नहीं था। साथ ही लगेज में पेंट थिनर जैसा ज्वलनशील पदार्थ भी रखा हुआ था, जिसने संभवत: आग को अचानक भड़का दिया। आपातकालीन द्वार नहीं होने से यात्री अंदर ही कैद हो गए।

रिपोर्ट

आपातकालीन द्वार की जगह बना दी गई सीट

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रारंभिक निरीक्षण में सामने आया है कि बस के आपातकालीन निकास द्वार के ऊपर स्लीपर कंपार्टमेंट का निर्माण कर दिया गया था। इसकी वजह से आपातकालीन द्वार ही बंद हो गया था।

एक अधिकारी ने कहा, "आपातकालीन निकास द्वार अवरुद्ध हो गया था क्योंकि उसके ऊपर एक स्लीपर कंपार्टमेंट बना दिया गया था। हमें प्रारंभिक उल्लंघन मिले हैं। परमिटों पर आगे की जांच की जाएगी।"

पेंट थिनर

चलती बस में धुम्रपान कर रहे थे ड्राइवर और हेल्पर

अधिकारी ने आगे कहा, "सामान रखने वाले कंपार्टमेंट में पेंट थिनर भी मिला है। हम जांच कर रहे हैं कि क्या ज्वलनशील तरल पदार्थों को ले जाने से संबंधित नियमों का उल्लंघन हुआ है।"

FIR में कहा गया है कि यात्रियों ने जलने की गंध आने की सूचना ड्राइवर और हेल्पर को दी थी, लेकिन उन्होंने बस नहीं रोकी। यह भी आरोप है कि ड्राइवर और हेल्पर केबिन में धूम्रपान कर रहे थे।

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चालान

बस के 19 चालान हो चुके

ये भी सामने आया है कि बस पर पहले से 19 चालान दर्ज थे। इन चालानों की कुल राशि 1,07,632 रुपये है।

इनमें सबसे ज्यादा 7 चालान तेज गति से जुड़े हैं। 4 चालान बस को खतरनाक स्थिति में खड़ा करने या गलत तरीके से पार्किंग से जुड़े बताए गए हैं।

2 चालान पंजीयन कार्ड से संबंधित उल्लंघन के हैं।

बस पर परमिट की शर्तों के उल्लंघन से जुड़े कई मामले भी दर्ज हैं।

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गिरफ्तारी

ड्राइवर और सहायक गिरफ्तार

पुलिस ने बस ड्राइवर पवन और कंडक्टर योगेश को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना के बाद कई शव बुरी तरह जल गए हैं, जिस वजह से उनकी पहचान नहीं हो पा रही है। शवों की पहचान के लिए DNA जांच की जा सकती है।

वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं।

बस के मालिक का संबंध मध्य प्रदेश से बताया जा रहा है।

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