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NEET UG 2026: एक व्हाट्सऐप मैसेज ने परीक्षा रद्द कराने में किस तरह निभाई भूमिका?
एक व्हाट्सऐप मैसेज ने रद्द करा दी NEET UG 2026 परीक्षा (तस्वीर: फाइल)

NEET UG 2026: एक व्हाट्सऐप मैसेज ने परीक्षा रद्द कराने में किस तरह निभाई भूमिका?

May 12, 2026
07:22 pm

क्या है खबर?

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को गत 3 मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) UG 2026 को रद्द करने का ऐलान किया है। इससे परीक्षा में शामिल हुए करीब 22 लाख अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। NTA ने यह फैसला राजस्थान में व्हाट्सऐप पर 'गेस पेपर' नाम से वायरल हुए एक मैसेज में शामिल प्रश्नों के वास्तिक प्रश्नपत्र में आने के बाद उपजे विरोध को देखते हुए लिया है। आइए यह पूरा मामला जानते हैं।

ऐलान

NTA ने क्या किया ऐलान?

NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा, "व्हाट्सऐप 'गेस पेपर' के प्रश्नों के मूल प्रश्न पत्र में आने को देखते हुए 3 मई को आयोजित परीक्षा रद्द कर दी गई है। इस गड़बड़ी के लिए हम जिम्मेदार हैं। परीक्षा दोबारा कराई जाएगी। " उन्होंने कहा, "सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी है। NTA जांच में पूरा सहयोग करेगी।" इसके बाद CBI ने इस संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

प्रकरण

क्या है 'गेस पेपर' का मामला?

NEET UG परीक्षा से पहले 150 पन्नों की PDF व्हाट्सऐप पर साझा की गई थी। इसे 'गेस पेपर' नाम दिया गया था। इसमें कुल 410 प्रश्न थे। दावा है कि PDF में शामिल प्रश्नों में से 140 प्रश्न मूल परीक्षा के प्रश्न पत्र से मिल रहे थे। इसमें अधिक प्रश्न जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान से संबंधित थे। इसके बाद परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों ने विरोध शुरू कर दिया। इसी विरोध को देखते हुए NTA ने परीक्षा रद्द कर दी।

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शुरुआत

कैसे हुई व्हाट्सऐप मैसेज की शुरुआत?

राजस्थान पुलिस के विशेष ऑपरेशन समूह (SOG) की जांच से पता चला है कि सबसे पहले 'गेस पेपर' सीकर निवासी राकेश मंडावरिया द्वारा देहरादून से चूरू के एक MBBS छात्र को साझा किया गया था, जो केरलम में अध्ययनरत है। केरलम में पढ़ रहे छात्र ने कथित तौर पर इसे 1 मई को सीकर में अपने दोस्त को भेजा। उसके बाद उसने इसे एक PG संचालक को भेजा और उसने इसे अपने PG में रहने वाले छात्रों को भेज दिया।

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वायरल

तेजी से वायरल हुआ 'गेस पेपर'

SOG के अनुसार, PG में रहने वाले छात्रों ने इसे अन्य छात्रों और करियर काउंसलरों के साथ साझा किया और इसी तरह यह सिलसिला चलता रहा। अधिकारियों का कहना है कि 'गेस पेपर' की छपाई भी हुई हो सकती है। ऐसी स्थिति में लीक का पता लगाना और भी अधिक कठिन हो जाता है। हालांकि, व्हाट्सऐप पर मिले इस पेपर में एक ही हैंडराइटिंग में 400 से अधिक प्रश्न लिखे गए थे। ऐसे में इसकी जांच की जा रही है।

खुलासा

कैसे हुआ 'गेस पेपर' का खुलासा?

SOG के अनुसार, 3 मई को परीक्षा के बाद सीकर के एक पीजी संचालक ने उद्योग नगर थाने और NTA को कथित 'गेस पेपर' बड़ी संख्या में छात्रों को मिलने की शिकायत की। अधिकारियों ने अब शिकायत करने वाले PG संचालक से भी पूछताछ शुरू कर दी है। इसके पीछे कारण माना जा रहा है कि PG संचालक ने 'गेस पेपर' के व्यापक रूप से फैलने के बाद संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए यह शिकायत दर्ज कराई होगी।

कार्रवाई

मामले में अब तक क्या-क्या हुई कार्रवाई?

6-7 मई को परीक्षा की आंसर-की सामने आने के बाद छात्रों और कोचिंग सेंटर्स में एक कथित 'गेस पेपर' को लेकर चर्चा शुरू हुई। इसके बाद NTA को भी 7 मई को कथित गड़बड़ियों से जुड़े कुछ सुराग मिल गए। इस पर 8 मई को NTA ने जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी। इस बीच राजस्थान SOG ने विभिन्न जगहों पर छापेमारी करते हुए 12 मई तक सीकर और उसके आसपास के इलाकों से 13 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

बयान

SOG के ADG ने दिया अहम बयान

जयपुर में SOG के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल ने कहा, "यह गेस पेपर परीक्षा से करीब एक महीने पहले से ही छात्रों के पास था। अभी तक की जांच में यह पता नहीं चल पाया है कि प्रश्न पत्र कहां से आया और यह व्हाट्सऐप पर परीक्षा देने वाले छात्रों के मोबाइल फोन में मिला है।" उन्होंने कहा, "हम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। यह एक श्रमसाध्य और कष्टदायक प्रक्रिया है। सभी (SOG) अधिकारी इसमें शामिल हैं।"

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