देश में हर दिन 6 बेटियां हुई हैं दहेज की मौत का शिकार, सामने आए डरावने आंकड़े
ट्विशा शर्मा की हाल ही में हुई मौत ने दहेज से जुड़ी हिंसा के दर्दनाक मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है।
न्यूज18 ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इन आंकड़ों के मुताबिक, 1995 से अब तक दहेज प्रताड़ना के कारण करीब 65,000 महिलाओं ने अपनी जान ली है। इनमें से लगभग 48,000 महिलाएं 18 से 30 साल की उम्र के बीच थीं।
इस आयु वर्ग की महिलाओं का यह अनुपात समय के साथ घटता-बढ़ता रहा है। साल 2011 में यह सबसे कम 65.7 प्रतिशत था, जबकि 2019 में 77.7 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
2024 में भारत में 1,360 दहेज से जुड़ी आत्महत्याएं हुईं
केवल 2024 की बात करें तो भारत में दहेज से जुड़ी 1,360 आत्महत्याएं दर्ज की गईं। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन करीब 4 महिलाओं ने दहेज के कारण अपनी जान दे दी। इनमें से ज्यादातर पीड़ित अब भी कम उम्र की लड़कियां या महिलाएं थीं।
साल 2020 से 2022 के बीच दहेज से जुड़ी आत्महत्याओं के मामलों में मध्य प्रदेश सबसे आगे रहा था। हालांकि, 2023 में उत्तर प्रदेश ने उसे पीछे छोड़ दिया और 2024 में भी उत्तर प्रदेश का आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा।
2024 में उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में मिलाकर दहेज से जुड़ी 54 प्रतिशत से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। (यह आंकड़ा सिर्फ दहेज से हुई मौतों का है, आत्महत्याओं का नहीं)।
अगर हम 2020 से 2024 के बीच दहेज से जुड़ी आत्महत्याओं के मामलों को देखें तो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा।
दहेज के कारण हुई मौतों के मामलों में 2020 से लेकर अब तक गिरफ्तारियों में करीब 20 प्रतिशत की कमी आई है।
आंकड़ों से पता चलता है कि महिलाओं के लिए दहेज का यह मुद्दा कितना गंभीर और दिल दहला देने वाला बना हुआ है।